The Rabbit House Review: सस्पेंस से भरी हुई है पद्मानभ गायकवाड़ की फिल्म, जीत चुकी है कई अवॉर्ड्स
फिल्म: द रैबिट हाउस
कास्ट: पद्मानभ गायकवाड़, करिश्मा और अमित रियान
डायरेक्टर: वैभव कुलकर्णी
फिल्म अवधि: 2 घंटे 30 मिनट
रेटिंग: 3.5 स्टार्स
The Rabbit House Review: साल 2025 की शुरुआत हो गई है। इस साल सिनेमाघरों में कई बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं। लेकिन इसकी शुरुआत फिलहाल छोटे बजट की 'द रैबिट हाउस' से हुई है। इस फिल्म की खासियत है कि ये इंटरनेशनल अवॉर्ड्स भी जीत चुकी है। अब ये भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, फिल्म कैसी है पढ़िए ये डिटेल रिव्यू।

गुस्सा बना हत्या का कारण
शुरुआत फिल्म की कहानी से करें तो ये एक कपल की कहानी है। श्रीकांत (अमित रियान) और कोमल (करिश्मा) की नई-नई शादी हुई है। ये दोनों शादी के बाद हिमाचल प्रदेश घूमने के लिए जाते हैं। जहां धीरे-धीरे कोमल को पता लगता है कि श्रीकांत को एंगर (गुस्सा) इश्यूज हैं, जिसकी वजह ओसीडी (एक तरह की बीमारी) है। ये दोनों जिस रैबिट हाउस में रुकते हैं, वहां के मालिक का बेटा मोहित (पद्मानभ गायकवाड़) इनसे मिलता है। श्रीकांत की बातचीत मोहित को एक-आध बात खटकती भी है। कोमल पर श्रीकांत हाथ भी उठा देता है और आखिरकार एक पहाड़ से नीचे फेंक देता है। हालांकि जिस तरह रिव्यू में ये कहानी सिंपल तरीके से बताई है, ऐसा है नहीं। इसमें कई सवाल उठते हैं। जैसे क्या वाकई श्रीकांत ने कोमल को पहाड़ से धक्का दिया? क्या वाकई कोमल की मौत हो गई? क्या कोमल जिंदा है? क्या श्रीकांत कसूरवार है या बेकसूर। इन सारे सवालों के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
लीड एक्टर्स को मिला सपोर्टिंग कास्ट का साथ
फिल्म में करिश्मा, पद्मानभ गायकवाड़ और अमित रियान का काम शानदार हैं। सभी ने अपने किरदारों को समझने की पूरी कोशिश की है। इन तीनों ने ही अपने अपने किरदारों में जान डाली है और उसकी गहराई को बनाए रखा है। फिल्म की सबसे अच्छी बात है कि जितना अच्छा काम लीड एक्टर्स ने की है। उससे ज्यादा बेहतरीन काम फिल्म के सपोर्टिंग एक्टर्स ने की है। इसमें सुरेश, गगन प्रदीप, सुजाता मोगल, पूर्वा सहित कई अन्य एक्टर्स भी शामिल हैं।
कहानी हो सकती थी क्रिस्प
टेक्निकल रूप से भी फिल्म ठीक है। मेकर्स की कोशिश रही है कि फिल्म को जबरदस्त तरीके से कसा हुआ रखा है। फिल्म का स्क्रीनप्ले और सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। फिल्म को मजबूत इसका बैकग्राउंड स्कोर बनाता है। जिससे फिल्म के सीन में जान आती है। फिल्म का कलर पैलेट भी एक अहम पहलू है, जिसका ध्यान एडिटिंग के दौरान रखा गया है। हालांकि फिल्म को अगर थोड़ा सा और क्रिस्प रखा जाता तो बेहतर रहता। जो फिल्म को और इंट्रेस्टिंग बनाकर रखता।
कुल जमा बात है ये है कि ये फिल्म डीसेंट है। जिससे आप साल की शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकते हैं। हालांकि इसके सामने पुष्पा 2 अभी है। ख़ैर आप भी फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए।












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