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Tehran Movie Review: जटिल विषय पर बनी इंटेलिजेंट फिल्म है 'तेहरान', जानिए क्यों देखनी चाहिए

Tehran Movie Review in Hindi: देशभक्ति सिर्फ नारे लगाने से नहीं, कभी-कभी सच्चाई को समझने और सवाल पूछने से भी जुड़ी होती है। भारत देश में एक से बढ़ कर एक देशभक्त हुए हैं। जिन्होंने न सिर्फ देश के संकट को हटाया है, बल्कि देशभक्ति के असल मायने भी समझाए हैं। ऐसे में इस स्वतंत्रता दिवस भी एक फिल्म रिलीज हुई है। जॉन अब्राहम की फिल्म, तेहरान। जो 2012 में हुई एक घटना पर आधारित है। फिल्म लंबे इंतजार के बाद हुई रिलीज हुई है। पहले फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी। लेकिन इसे अब डायरेक्ट ओटीटी पर उतारा गया है।

तेहरान कोई टिपिकल 'स्पाई मूवी' नहीं है जिसमें हीरो हवा में उड़कर दुश्मनों को एक मुक्के में पस्त कर देता है। तेहरान एक ऐसी जासूसी फिल्म है जो हकीकत के बेहद करीब है। यह राजनीति, निजी दुख और नैतिक उलझनों की दुनिया में उतरती है, और यहीं इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाती है। 2012 में दिल्ली में हुए धमाके के बैकड्रॉप पर आधारित ये कहानी, भारत के अलावा ईरान और इज़राइल की जटिल राजनीति को भी दिखाती है। धमाके की जांच के दौरान जब डीसीपी राजीव को पता चलता है कि इस केस से उनका निजी रिश्ता है। तब फिल्म सिर्फ एक मिशन नहीं, एक निजी युद्ध बन जाती है।

Tehran Movie Review

राजीव कुमार के किरदार में जॉन अब्राहम एकदम नए अंदाज़ में नज़र आते हैं। न कोई भारी-भरकम डायलॉग, न ही ज़रूरत से ज़्यादा स्टाइल। सिर्फ खामोशी, जिम्मेदारी और अंदर ही अंदर चल रही जंग। यह परफॉर्मेंस जॉन की सूझबूझ और उनके अंदर के एक्टर को भी दिखाती। मानुषी छिल्लर ने सीमित स्क्रीन टाइम में ठीक काम किया है। उनका किरदार कहानी के टर्निंग पॉइंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नीरू बाजवा एक कूटनीतिक अधिकारी के रूप में शांति और बुद्धिमत्ता को दिखाती हैं।

फिल्म को रितेश शाह, आशीष पी. वर्मा और बिंदनी करिया ने मिलकर लिखा है। इस फिल्म की एक खासियत है कि इसमें किसी एक पक्ष को ही बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है। इसमें ऐसा भी नहीं किया है कि सिर्फ इमोशन ही भर दिए हैं। कहानी दर्शकों के इंटेलिजेंस को भी भांपती है। कुछ जगह पर स्लो लगती है, लेकिन सटीक दिखाने की कोशिश की गई है। निर्देशक अरुण गोपालन ने बिना कोई दिखावा किए, एक सधा हुआ और संजीदा फिल्म बनाई है। बतौर निर्देशक उनका काम भी अच्छा है। कैमरा वर्क दिल्ली की भीड़ और विदेशी लोकेशनों दोनों में माहौल को बखूबी पकड़ता है। बैकग्राउंड म्यूजिक न ज़्यादा ज़ोरदार है, न ही गायब। एडिटिंग काफी सटीक है। जो फिल्म को और सधा हुआ बनाती है।

तेहरान सिर्फ एक थ्रिलर नहीं है। यह एक आइना है, जो बताता है कि आज की दुनिया में राजनीति, जासूसी और इंसानियत की लड़ाई एक-दूसरे से कितनी उलझी हुई है। मैडॉक फिल्म्स की तेहरान ZEE5 पर रिलीज हो गई है। इस लॉन्ग वीकेंड आप अपने ही घर में कुछ देखना चाहते है तो इसे देख सकते हैं।

फिल्म रिव्यू: तेहरान
निर्देशक: अरुण गोपालन
कलाकार: जॉन अब्राहम, नीरू बाजवा, मानुषी छिल्लर, हादी खजनपोर
रेटिंग: 4

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