Crazxy Review: सोहम शाह की फिल्म में है गजब का थ्रिल, स्क्रीनप्ले और एक्टिंग कुर्सी से नहीं हिलने देगी
फिल्म: क्रेजी (CrazXy)
कलाकार: सोहम शाह
निर्देशक: गिरीश कोहली
संगीत: विशाल भारद्वाज, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, जैस्पर किड
रेटिंग: 3.5 स्टार्स
Crazxy Movie Review: बॉलीवुड में अक्सर थ्रिलर फिल्मों को थोड़ा जरूरत से ज़्यादा लंबा खींच दिया जाता है। इस वजह से वो फिल्में थोड़ी बोरिंग और उबाऊ हो जाती हैं। सोहम शाह भी एक थ्रिलर जॉनर फिल्म लेकर आए हैं। इसका नाम क्रेजी है। लेकिन क्रेज़ी अपनी शार्प कहने के अंदाज और तेज रफ्तार के कारण अलग ही जगह बनाने की कोशिश करती है। फिल्म 93 मिनट की है। इतने में ही आपको एक अलग सिनेमैटिक एक्सपीरियंस देखने को मिलता है।

कहानी है डॉ. अभिमन्यु सूद (सोहम शाह) की, जो एक असंभव परिस्थिति में फंस जाते हैं। इसमें उन्हें तुरंत 5 करोड़ रुपये की जरूरत है। लेकिन इससे पहले कि वह कोई हल निकाल पाते, उन्हें एक कॉल आता है जो उनकी दुनिया ही पलट देता है। उनकी बेटी का अपहरण हो चुका है और फिरौती की मांग उठी? कितने रुपए? ठीक 5 करोड़ रुपये। इसके बाद शुरू होती है घटनाओं की एक रोमांचक और अप्रत्याशित कड़ी। जहां हर बीतता पल अभिमन्यु को और गहरे खतरे में धकेल देता है।
ख़ैर क्रेज़ी सिर्फ थ्रिल पर निर्भर नहीं करती है। यह एक पिता और बेटी के जटिल रिश्ते को भी बखूबी दिखाती है। जिससे कहानी का प्रभाव और भी प्रबल हो जाता है। गिरीश कोहली इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि फिल्म अनावश्यक सबप्लॉट्स या भटकाव से बची रहे। हर सीन सस्पेंस को और मजबूत करने के लिए ही रखा गया है, जिससे दर्शक आखिरी फ्रेम तक पूरी तरह जुड़े रहते हैं।
सोहम शाह का करियर का बेहतरीन प्रदर्शन
Tumbbad और Maharani में दमदार अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले सोहम शाह ने इस फिल्म में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। वह एक ऐसे पिता की भूमिका निभा रहे हैं, जो असंभव परिस्थितियों से जूझ रहा है। और उनका अभिनय पूरी तरह से वास्तविक लगता है। बिना किसी अतिरिक्त नाटकीयता के, सिर्फ एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और चुप्पी के ज़रिए वह अपने किरदार की गहराई को उभारते हैं। डर, निराशा और दृढ़ संकल्प-हर भावना को उन्होंने इतनी बारीकी से निभाया है कि दर्शक उनके सफर में पूरी तरह डूब जाते हैं। फिल्म में टीनू आनंद भी हैं, उनका काम भी बेहद शानदार है।
गिरीश कोहली का कसा हुआ निर्देशन
गिरीश कोहली ने यह सुनिश्चित किया है कि क्रेज़ी कहीं भी अपनी पकड़ न खोए। इस फिल्म की ताकत इस बात में है कि यह केवल तेज़ रफ्तार एक्शन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसका तनाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता जाता है। हर ट्विस्ट को मजबूती से गढ़ा गया है, जिससे यह बनावटी नहीं बल्कि एकदम वास्तविक लगता है।
कसा स्क्रीनप्ले और दमदार सिनेमेटोग्राफी
फिल्म की पटकथा बेहद चुस्त है, बिना किसी फालतू दृश्य के कट टू कट बात करती है। हर सीन कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अहम है और हर क्षण महत्वपूर्ण भी लगता है। इन सभी वजहों से ये फिल्म एक अच्छी थ्रिल साबित होती है। दृश्यात्मक रूप से, क्रेज़ी काफी गहरे और तनावपूर्ण माहौल को उभारती है। सिनेमेटोग्राफी फिल्म के तनाव को और तीव्र बनाती है, खासतौर पर क्लोज-अप और हैंडहेल्ड शॉट्स, जो दर्शकों को कहानी के केंद्र में रख देते हैं।
संगीत और गीत माहौल को बनाता है बेहतर
फिल्म का संगीत एक और मजबूत पक्ष है। विशाल भारद्वाज, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और जैस्पर किड की धुनें कहानी में इतनी खूबसूरती से घुल जाती हैं कि वे कभी हावी नहीं होतीं। लेकिन हर भाव को और भी प्रभावी बना देती हैं। गुलजार और आनंद बख्शी के गीत फिल्म के इमोशन की गहराई को और बढ़ाते हैं। जिससे हर सीन का प्रभाव और गहरा हो जाता है।
क्रेज़ी सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि एक अनुभव है। इसकी कसावट भरी पटकथा, शानदार निर्देशन और सोहम शाह के करियर की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस इसे एक यादगार बनाती हैं। 93 मिनट की ये फिल्म आपको पूरी तरह से जकड़ कर रखती। आपको ये कुर्सी से हिलने नहीं देती है। यही पूरी फिल्म की खासियत भी है। फिल्म का सस्पेंस इसे बहुत बेहतरीन बनानीत है। अगर आपको फिल्म यानी अच्छी फिल्म देखनी है तो क्रेजी आपके लिए सही चुनाव हो सकती है। मेरी बात यहीं तक आप भी फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए।












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