Kalki 2898 AD Review: अमिताभ बच्चन ने 'अश्वत्थामा' बन फूंकी जान, स्क्रीनप्ले को VFX ने ऐसे बचाया

Kalki 2898 AD: साउथ सुपरस्टार और बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्म कल्कि 2898 थिएटर में रिलीज हो चुकी है। प्रभास की फिल्म को लेकर दर्शकों के मन में एक डाउट था कि इस फिल्म को देखने का कष्ट करना भी चाहिए या फिर नहीं। क्या हमें 'कल्कि पार्ट 2' का इंतजार करना चाहिए या फिर नहीं। क्या तकनीक और एक्शन के लिहाज से ये फिल्म फैंस के दिलों में उतर पाई या फिर नहीं? ये कई सारे सवाल हैं, जिसके जवाब आपको इस आर्टिकल में मिल जाएंगे।

कैसी है मोस्ट अवेटेड 'कल्कि'?
सबसे पहले तो बात करते हैं फिल्म में साउथ सुपरस्टार प्रभास की, फिल्म रिलीज होने से पहले से ही प्रभास को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज बना हुआ था। मगर बताते चलें कि फिल्म में प्रभास का सिर्फ गेस्ट अपीयरिंस ही है। अगर प्रभास को फिल्म में अच्छी तरह देखना चाहते हैं तो आपको कल्कि 2889 एडी के पार्ट 2 का इंतजार करना होगा।

Kalki 2898 AD review

क्रांतिकारियों ने बनाया ये शहर
अब बात करते हैं फिल्म की कहानी की, कल्कि की कहानी को हम आपको बिना स्पॉइलर्स के ही बताने की कोशिश करेंगे। इस फिल्म की कहानी ऐसी है, जिसमें अमीरों को अमीर और गरीबों को और भी गरीब दिखाया गया है। फिल्म में शंबाला नाम का एक शहर है, जो कुछ क्रांतिकारों ने मिलकर बनाया है। इस शहर में भगवान को आज भी लोग पूजते हैं।

अमीरों की दुनिया ने चलाया जादू
वहीं इनका एक दुश्मन है (कमल हसन), जिसका नाम फिल्म में कली है। इस कली ने कॉम्प्लेक्स नाम की अमीरों के लिए एक दुनिया बनाई है। भगवान का जन्म होने वाला है, जिसे पैदा होने से पहले ही कली आर्मी खत्म कर देना चाहती है। अब अगर आप इसके आगे की कहानी को देखना चाहते हैं तो आपको फिल्म जरूर देखनी होगी।

फर्स्ट हाफ से क्यों निराश हुए लोग?
फिल्म में अमिताभ बच्चन को देखना काफी सुखद है। जब आप अश्वत्थामा बने यंग अमिताभ को देखते हैं तो लगता है कि पैसा वसूल हो ही गया। मगर साउथ के फिल्ममेकर्स से ये भी दर्ख्वास्त है कि फर्स्ट हाफ को इतना भी बोरिंग ना बनाओ कि सेकेंड हाफ देखने के लिए एनर्जी ही ना बच जाए। अगर फिल्म की कहानी शॉर्ट टाइम में ही खत्म हो सकती है तो उसे ज्यादा खींचने की जरूरत नहीं है।

कैसी है फिल्म की कॉमेडी?
फिल्म का हर एक्शन और सीन काफी ओरिजनल लगता है। डायरेक्टर नाग अश्विन ने फिल्म को काफी ओरिजनल रखने की कोशिश की है। चाहे बात प्रभास की लड़ाई की हो या फिर अश्वत्थामा और भैरव के बीच के युद्ध की हो। मगर एक बात जो बेहद ही बुरी लगी , वो ये कि फर्स्ट हाफ में फिल्म की कहानी को जबरदस्ती खींचने की कोशिश की गई है। मगर कहानी इंटरवल के बाद काफी इंट्रस्टिंग हो जाती है। फिल्म में कॉमेडी भी अच्छी है।

युवाओं को भी आ जाए शर्म
फिल्म के डायलॉग्स की बात की जाए तो ऐसा कोई दमदार डायलॉग नहीं है, जिसकी खूब तारीफ की जाए या फिर जो वायरल हो जाए या फिर जिसे फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रखा जाए। फिल्म में अमिताभ बच्चन के एक्शन सीन देखकर तो युवाओं को भी शर्म आ जाए। उनकी एनर्जी वाकई में कमाल की है। ऐसे में अगर आप भी बच्चन साहब के फैन हैं तो आपको ये फिल्म देखने के लिए थिएटर में जरूर जाना चाहिए।

अमिताभ बच्चन का चला जादू
फिल्म में दिशा पाटनी का कैमियो तो है मगर उसे हम सेकेंड हाफ की शुरुआत से पहले यानी कि फर्स्ट हाफ के एंड से भी पहले भूल जाते हैं। फिल्म का सेकेंड हाफ वाकई काफी दमदार है और यहां कल्कि 2 के लिए पूरा-पूरा माहौल तैयार हो रहा है। इस फिल्म को देखने से कहीं से भी नहीं लग रहा है कि ये प्रभास की फिल्म है। सारी फिल्म तो अमिताभ बच्चन के ही इर्द गिर्द घूम रही है।

रेटिंग- 2 स्टार
डायरेक्टर- नाग अश्विन
फिल्म के कलाकार- प्रभास, दीपिका पादुकोण, दिशा पाटनी, अमिताभ बच्चन, कमल हासन

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