कानूनी पचड़े में फंसी गंगूबाई काठियावाड़ी, परिवार ने की रिलीज पर रोक लगाने की मांग, कहा- 'वह वेश्या नहीं थीं'

ऐसे में जब संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी का बर्लिनाले में वर्ल्ड प्रीमियर करने को बिल्कुल तैयार हैं, उनकी फिल्म कानूनी पचड़े में फंस गयी है।

मुंबई, 16 फरवरी। ऐसे में जब संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी का बर्लिनाले में वर्ल्ड प्रीमियर करने को बिल्कुल तैयार हैं, उनकी फिल्म कानूनी पचड़े में फंस गयी है। इस फिल्म में आलिया भट्ट ने गंगूबाई का किरदार निभाया है, जो फिल्म का मुख्य किरदार है। दरअस्ल यह फिल्म हुसैन जैदी की पुस्तक 'माफिया क्वींस ऑफ मुंबई' पर आधारित है। फिल्म 25 फरवरी को रिलीज होने को तैयार है, लेकिन रिलीज से पहले ही फिल्म कानूनी पचड़े में फंसती हुई दिखाई दे रही है।

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गंगूबाई के परिवार ने की फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग

गंगूबाई के परिवार ने की फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग

गंगूबाई के परिवार ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने को कहा है। इस मामले में संजय लीला भंसाली, हुसैन जैदी और आलिया भट्ट को नोटिस भेजा गया है और उन पर मानहानि का केस लगाया गया है। गंगूबाई द्वारा गोद लिए गए बच्चों की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र दुबे ने कहा, 'कोई नहीं चाहता कि उनकी मां को एक वेश्या के रूप में चित्रित किया जाए। एक वेश्या का बेटा भी ऐसा नहीं चाहेगा। यह सिर्फ पैसों के लिए किया जा रहा है, यह एक व्यक्ति के चरित्र की हत्या है। यह केवल एक मां-बेटे की बात नहीं है बल्कि हर महिला के सम्मान की बात है। कोई भी महिला नहीं चाहेगी कि उसे इतने नग्न और अश्लील तरीके से चित्रित किया जाए। हुसैन जैदी ने अपनी किताब में जो लिखा है, उस पर भले ही विश्वास किया जाए, लेकिन उन्होंने (उनके बच्चों ने) कहा कि गंगूबाई कभी भी वेश्या नहीं बनना चाहती थीं। तो क्या वह महिला एक वेश्या के रूप में चित्रित होना चाहेगी? वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं और उनके परिवार ने मुझे बताया कि मोरारजी देसाई, जवाहर लाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव के दौरान उनके घर आते थे क्योंकि उस समय कमाठीपुरा में वह एक प्रसिद्ध चेहरा थीं। उन्होंने वेश्याओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।'

इतनी देरी से क्यों की फिल्म की रिलीज को रोकने की मांग

इतनी देरी से क्यों की फिल्म की रिलीज को रोकने की मांग

फिल्म की रिलीज पर लोग लगाने की मांग का समय चुनने पर उन्होंने कहा कि फिल्म का प्रोमो रिलीज होने के बाद ही हमने सितंबर 2020 में कोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने बच्चों के गोद लेने का सबूत मांगा। हाई कोर्ट बच्चों के गोद लेने का सबूत मांग रही है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। हमें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट फिल्म की रिलीज से पहले इस पर सुनवाई करेगा। उन्होंने कहा कि क्राइम रिपोर्टर द्वारा लिखे जा रहे उपन्यासों के बारे में हर किसी को पता नहीं हो सकता है।

गंगूबाई ने लिए थे चार बच्चे गोद

गंगूबाई ने लिए थे चार बच्चे गोद

बता दें कि गंगूबाई ने चार बच्चे गोद लिए थे- बाबूराव, बेबी, शकुंतला और राजन। जैदी की किताब के अनुसार गंगूबाई फिल्मों के आकर्षण को देखकर घर से भाग गई थीं, लेकिन उनके प्रेमी ने उन्हें सेक्स वर्क के लिए बेच दिया। वह अंडरवर्ल्ड के साथ-साथ मुंबई के रेड-लाइट एरिआ कमाठीपुआ जिले में एक प्रमुख और प्रसिद्ध शख्सियत बन गईं।

किताब लिखने और फिल्म को बनाने के लिए हमसे नहीं ली गई अनुमति

किताब लिखने और फिल्म को बनाने के लिए हमसे नहीं ली गई अनुमति

एक समाचार चैनल से बातचीत में बाबूराव ने कहा कि उनकी मां एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। उन्होंने मेरी मां को एक सेक्स वर्कर के तौर पर दिखाया है और लोग उनके बारे में तरह-2 की बातें कर रहे हैं। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं। वहीं गंगूबाई की पोती ने कहा कि ये फिल्ममेकर लालची हैं और पैसों के लिए हमारे परिवार को बदनाम कर रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब यह किताब लिखी जा रही थी तो हमसे कोई सहमति नहीं ली गई और फिल्म बनाते वक्त भी हमसे नहीं पूछा गया।

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