Deva Review: देव बने शाहिद कपूर को देख याद आया 'कबीर सिंह', क्लाइमैक्स छोड़ फिल्म 'मुंबई पुलिस' जैसी है 'देवा'

डायरेक्टर- रोशन एंड्रयूज
कास्ट- शाहिद कपूर, पूजा हेगड़े, कुब्रा सैत, पवैल गुलाटी और प्रवेश राणा
रेटिंग- 3.5 स्टार्स

Deva Movie Review: देवा रिलीज हो गई है। इसमें मुख्य भूमिका में हैं शाहिद कपूर। उनका किरदार पुलिसवाला है और उसकी दो समस्या हैं। एटीट्यूड और एंगर इश्यूज। जिसकी वजह से उसे पुलिस वाला माफिया कहते हैं। देव के तौर तरीकों से उसके आस पास वाले काफी परेशान रहते हैं। जूनियर अफसर उससे डरते हैं। लेकिन शाहिद देव के किरदार में जैसे नजर आ रहे हैं। उसे रिलीज के पहले अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन से भी जोड़ा जा रहा था। अब जब फिल्म देखी तो ऐसा लग रहा है कि शाहिद का ऐसा एटीट्यूड हम देख चुके हैं। कबीर सिंह में....हां... उस सीन में जब कबीर प्रीति पर कलर डालने वालों को मारने जाता है। वैसा ही गुस्सा और वही अंदाज उनका देव में भी दिखा। ऐसे में बहुत मुश्किल है देव और कबीर सिंह में फर्क करना।

Deva Movie Review

देवा की कहानी की बात करें तो इसकी कहानी डायरेक्टर रोशन एंड्रयूज की 2005 में आई मुंबई पुलिस (Mumbai Police Movie) की ही जैसी है। बस इसका क्लाइमैक्स अलग है। क्योंकि इस बार देवा की राइटिंग टीम में 6 लोग हैं। बॉबी संजय, अब्बास दलाल, हुसैन दलाल, अरशद सईद और सुमित अरोड़ा। इनके होते हुए भी फिल्म अपने आपको नहीं बचा पाई। पूरी फिल्म में देव का ही किरदार को ही गढ़ने की कोशिश की गई है। लेकिन वो भी ज्यादा मजबूत नहीं बन पाया। फिल्म की हिरोइन पूजा हेगड़े हैं, उनको क्यों रखा गया है फिल्म में ये सवाल हर कोई जानना चाहता है। शाहिद के अभिनय के बारे में आपको बता ही दिया है। ऐसा लग रहा है कि वो कबीर सिंह के किरदार से निकल ही नहीं पाए हैं। फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट पवैल गुलाटी, कुब्रा सैत और प्रवेश राणा का काम अच्छा है।

रोशन एंड्रयूज मलयालम सिनेमा के स्टैब्लिश डायरेक्टर हैं। अब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा है। जो फीका है। पूरी फिल्म की कहानी मुंबई शहर की है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि मुंबई को वैसा दिखाया ही नहीं है। डायरेक्शन में भी उनका कोई खास काम नहीं किया है। फिल्म के स्टंट सुप्रीम सुंदर के अलावा अब्बास अली मुगल, अनिल अरासु, परेज शेख और विक्रम दहिया ने भी एक्शन सीन डिजाइन किए हैं। लेकिन वो भी बेअसर रहे हैं। देवा का म्यूजिक विशाल मिश्रा ने दिया है, जिसमें कुछ भी खास नहीं है।

कुल मिलाकर इसे आप रिव्यू ना कहकर रैंट भी कह सकते हैं। क्योंकि जब मैं फिल्म देख रहा था, तब पूरे हॉल में मैं अकेला था। उसी सिनेमाघर के अगले शो में भी 4-5 ही सीट बुक हुईं थी। ख़ैर, देवा अगर आप देखने जा रहे हैं तो बहुत उम्मीद के साथ मत जाइएगा। इसमें आपको वही शाहिद और रीमेक कहानी को नए कलेवर के साथ देखना है। मेरी बात यहीं तक आप भी फिल्म देखें और अपनी राय बनाएं।

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