बालोद के सरकारी दफ्तरों में गूंजेगी राजगीत "अरपा पैरी के धार ", कलेक्टर ने कहा, लेट आने वाले सुधर जाएं

बालोद इस मामले में छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन चुका है। जहां छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान में सभी जिला व तहसील कार्यालयों में रोजाना शासकीय कामकाज शुरु करने से पहले राजगीत गाया जाता है।

बालोद, 21 जुलाई। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने प्रदेश के पहले राजगीत की घोषणा की। इसके लिए संस्कृति विभाग और राज्य के संगीतकारों ने मिलकर डॉ नरेंद्र देव वर्मा द्वारा रचित "अरपा पैरी के धार" गीत को चुना। जिसके बाद प्रत्येक शासकीय कार्यक्रमों में राज गीत के प्रयोग को अनिवार्य किया। लेकिन बालोद इस मामले में छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन चुका है। जहां छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान में सभी जिला व तहसील कार्यालयों में रोजाना शासकीय कामकाज शुरु करने से पहले राजगीत गाया जाता है।

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बालोद बना प्रदेश का पहला जिला
कलेक्टर गौरव सिंह ने कार्यभार संभालते ही इसके निर्देश दिये जिसके बाद बालोद राजगीत से कामकाज की शुरआत करने वाला पहला जिला बन गया जिला संयुक्त कार्यालय में बालोद जिले के नवपदस्थ कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ की अस्मिता को लेकर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया जिसका सकारात्मक परिणाम पहले ही दिन से देखने को मिला.

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प्रतिदिन सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा राजगीत
बालोद में अब प्रतिदिन सुबह 9 बजकर 58 मिनट को पूरा कार्यालय के अधिकारी कर्मचारी समय में पहुंच रहें हैं। इसके बाद राजगीत अरपा पैरी के धार का गायन होता है। इस पहल से अभी कर्मचारी अब 10 बजे के पहले ही कार्यालय पहुंच रहें हैं। बालोद के सभी जिला कार्यालयों में एक और नई पहल शुरु की गई जिसमें संयुक्त जिला कार्यालय के संपूर्ण कार्यालयों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीरें भी लगाई जा रही हैं । बालोद कलेक्टर के चेंबर में समेत सभी कार्यालयों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर लगाई गई है.

अनुपस्थित रहे तो होगी कार्यवाई
कलेक्टर का कहना है कि ''छत्तीसगढ़ के अस्मिता और प्रशासनिक कसावट को एक साथ जोड़ कर यह निर्णय लिया गया है. इसका परिणाम भी अच्छा मिल रहा है. सभी कर्मचारी अधिकारी रोजाना सुबह 9 बजकर 58 मिनट को कार्यालय पहुंच रहें हैं। इस कार्य की रोजाना मॉनिटरिंग की जाएगी और लगातार अनुपस्थित रहने वाले अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता को मिले इसका लाभ
इन सब के निर्णय के पीछे कलेक्टर का मूल उद्देश्य है कि आम जनता को इसका लाभ मिले यदि शासकीय अधिकारी-कर्मचारी अपने दफ्तरों में 10 बजे से कामकाज शुरू कर देंगे। तो समय से पहुंचने वाले आम जनता को इसका लाभ मिल पाएगा। वहीं जब आम जनता कार्यालयों में छत्तीसगढ़ महतारी का सम्मान देखेंगे। तो वे अपने घरों में जाकर भी इस तरह के कदम उठाएंगे. ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ महतारी की पहचान पूरे देश में बनेगी।

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