छत्तीसगढ़ के हर्बल गुलाल, अष्टगन्ध की मांग इंडोनेशिया तक, पाटन के सांकरा में महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन के सांकरा में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका केंद्र का निर्माण किया गया है। जहां महिलाओं को विभिन्न उत्पाद निर्माण कर आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

दुर्ग, 22 जुलाई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन के सांकरा में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका केंद्र का निर्माण किया गया है। जहां महिलाओं को विभिन्न उत्पाद निर्माण कर आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी के तहत सांकरा में बड़े पैमाने पर हर्बल गुलाल और अष्टगंध का उत्पादन हो रहा है। इस हर्बल गुलाल का निर्यात अन्य देशों में भी की जा रही है। जिसके तहत अब इंडोनेशिया के बाली में हर्बल गुलाल का निर्यात किया जाएगा।

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इटली से इंडोनेशिया तक बढ़ी मांग,
छत्तीसगढ़ के सांकरा आजीविका केंद्र में बने हर्बल गुलाल अब उत्तर प्रदेश के काशी से उड़ीसा के पुरी और अब इटली से इंडोनेशिया तक अपनी पहचान बना रहा है। यह हर्बल गुलाल दुर्ग के कुमकुम स्व-सहायता समूह की महिलाएं बना रही है। और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। देश भर में होली आते ही हर्बल गुलाल की मांग बढ़ जाती है। खुशियों में लोग एक-दूसरे को रंगने के गुलाल का उपयोग करते हैं। दुर्ग के सांकरा में स्व-सहायता समूह की 60 महिलाएं बड़े पैमाने पर हर्बल गुलाल और अष्टगंध के उत्पादन के काम में लगी है.

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इंडोनेशिया के बाली में भी होगी सप्लाई

कुछ महीने पहले ही इटली की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरी झंडी दिखाकर 32 लाख रुपए के हर्बल गुलाल को इटली के लिए रवाना किया था। अब लगभग 40 लाख रुपए के गुलाल व अष्टगन्ध की सप्लाई इंडोनेशिया की बाली जैसे द्वीपों में भेजी जा रही है। दक्षिण पूर्वी एशिया में बाली जैसे द्वीपों तक हमारा प्रोडक्ट बिकता है क्योंकि यहां के मूल निवासी भी हिंदू धर्मावलंबी हैं और बड़े पैमाने पर भारतीय समुदाय के लोग इन देशों में बसे हैं।अष्टगंध का उपयोग विदेशों के मंदिरों में भी होता है।

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महिलाओं को मिला रोजगार, अब युवाओं की बारी
इस काम में लगी ममता बताती हैं कि इसके लिए मशीन गणेश ग्लोबल गुलाल फर्म नाम की कंपनी ने लगाई है। कंपनी ही अष्टगंध के लिए सामग्री प्रदान कर रही है और मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य कंपनी ही करती है। इसके साथ ही पूजा सामग्री धूप , हवन सामग्री का निर्माण भी महिलाएं कर रही हैं। वहीं महिलाओं को हर दिन 200 रुपए मानदेय के अलावा प्राफिट शेयरिंग भी की जाएगी। कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने बताया कि सांकरा स्व-सहायता समूह में हम ऐसी गतिविधियों को जगह दे रहे हैं जहां बड़े पैमाने पर स्थायी रोजगार की संभावना बने। जिस फर्म को यहां काम सौंपा गया है। वो ग्लोबल फर्म है और दुनिया भर के देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। मशीन भी कंपनी ने लगाई है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में हर्बल गुलाल की मांग भी तेजी से बढ़ी है। हमारे समूह की महिलाएं को रोजगार मिल रहा है। हम अब युवाओं को इससे जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि क्षेत्र के युवा भी नए अनुभव लेकर कार्य की शुरुआत कर सकें।

फूलों से बन रहा अष्टगंध व हर्बल गुलाल का इस्तेमाल
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अश्विनी देवांगन बताते है कि अष्टगंध का काफी उपयोग दक्षिण भारत, ओडिशा और काशी के धार्मिक स्थलों में होता है। गुलाल के उत्पादन के लिए मंदिरों से फूलों को चुना गया है। चार स्थानों मोहलई, कोनारी, सेलूद और नंदौरी में इसके लिए फूलों को सुखाया जा रहा है. सांकरा में इसकी प्रोसेसिंग होती है। क्षेत्र के कौही, ठकुराइनटोला जैसे मंदिरों में बड़े पैमाने पर फूल चढ़ाये जाते हैं. इन सभी का अच्छा उपयोग हर्बल गुलाल के लिए हो रहा है।

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