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राजनांदगांव: मिड-डे मील में समूहों की कांटामारी, बच्चे खा रहे आलू, सोयाबीन पतला दाल, स्कूलों से मीनू गायब

जिले के स्कूलों में मध्याह्न भोजन के नाम पर बच्चों के अधिकार पर ही कांटा मारा जा रहा है। वहीं समूहों को ही नही पता कि कब क्या बनाना है। मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को गर्म पानी में डूबी आलू की

राजनांदगांव, 25 जुलाई। जिले के स्कूलों में मध्याह्न भोजन के नाम पर बच्चों के अधिकार पर ही कांटा मारा जा रहा है। स्कूलों से भोजन मीनू गायब है। तो वहीं समूहों को ही नही पता कि कब क्या बनाना है। मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को गर्म पानी में डूबी आलू की सब्जियां और दाल के नाम पर पिला पतला गर्म पानी ही मिल रहा हैं। राजनानादगांव जिले के कुछ प्राथमिक स्कूलों में कुछ इसी तरह के हालात हैं।

mid-day mill

पानी युक्त सब्जी और दाल से बचने टिफिन ला रहे बच्चे
दरअसल कोरोना काल के दो साल बाद बच्चों ने स्कूल जाना शुरु किया है। लेकिन सरकारी शालाओं में मध्यान भोजन की स्थिति को देखकर बच्चे भी अब घर से ही टिफिन ले जाना मुनासिब समझते हैं। जिला मुख्यालय के ही स्कूलों में अव्यवस्थाओं का आलम है। शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन परिसर में जल भराव के अलावा बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल खडे़ हो रहे हैं।

जिले में 2673 समुहें करती हैं भोजन तैयार
अगर मानपुर मोहला, खैरागढ़ सहित राजनांदगांव जिले में शासकीय स्कूलों की बात करें तो जिले में कुल 1868 प्राथमिक स्कूल, 805 मिडिल स्कूल हैं। जिनमें एक लाख 86 हजार बच्चे शासकीय प्राथमिक व मिडिल स्कूल में पढ़ते हैं। जिनके लिए 2673 समूह भोजन तैयार करने का काम करती हैं। इन समूहों के माध्यम से 5291 रसोइयों की नियुक्ति की गई है इन समूह के माध्यम से बच्चों को भोजन प्रदान किया जाता है।

मीनू के अनुसार नहीं मिलता भोजन
स्कूलों में बच्चों को मीनू अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। इसे देखने वाला भी कोई नहीं है। बताया गया कि पिछले दिनों बच्चों को भाजी की सब्जी खिलाई गई। बैंगन की और टमाटर की चटनी से ही काम चलाया गया। जबकि शासन की ओर से इन सब्जियों पर फिलहाल मनाही है। बता दें कि शासन की ओर से मध्याह्न भोजन चलाने वाले समूहों को प्रति छात्र 5.19 पैसा मिलता है। लेकिन दो रुपए ही समूहों द्वारा खर्च किया जा रहा है।
समूहों पर मनमानी का आरोप
स्कूल प्रबंधन समूहों पर मनमानी करने का आरोप लगा रहे हैं। मोतीपुर के प्राथमिक शाला में गुणवत्ताहीन मध्याह्न भोजन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। गुणवत्ताहीन मध्याह्न भोजन का बच्चों ने बहिष्कार कर दिया। इसके बाद समूह द्वारा आनन-फानन में दूसरा भोजन तैयार किया गया। तब जाकर बच्चों को भोजन मिल पाया। स्कूल के प्रधान पाठक का कहना है। इस तरह बच्चों के अधिकार से खिलवाड़ नही होना चाहिए। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायत मिल रही थी। मामले से वार्ड पार्षद व बीईओ को अवगत करा दिया गया है।

75 बच्चों के लिए सिर्फ दो किलो आलू और सोयाबीन बड़ी
स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी अनुसार शाला में 75 बच्चे अध्ययनरत हैं, यहां दो समूहों द्वारा मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। स्कूल प्रबंधन ने वन इंडिया को बताया कि समूह द्वारा शासन से पैसा नहीं आने की बात कहकर बच्चों के लिए लगातार गुणवत्ताहीन भोजन तैयार किया जा रहा है। बीते गुरुवार को मोतीपुर स्कूल में 75 बच्चों के लिए महज दो किलो आलू और 1 पाव सोयाबीन की बड़ी की सब्जी बनाई गई थी। दाल भी फीकी और पतली बनाई गई थी। यही हाल जिले के लगभग 45 से 50 स्कूलों में देखने को मिलती है है।

फोन पर रसोइया को मिलता है उस दिन का मीनू
मोतीपुर स्कूल में दो समूहों द्वारा मध्याह्न भोजन चलाया जाता है। यहां दोनों समूहों ने रसोइया नियुक्त कर रखा है, लेकिन वे स्कूल ही नहीं आते उन्होंने अपनी जगहों पर दूसरों को रसोइया नियुक्ति किया हुआ है। वे फोन पर बता देते हैं कि आज क्या लेना है और क्या बनाना है।
अधिकारी बोल रहे जांच होगी
राजनांदगांव के जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर के अनुसार स्कूल में मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले समूहों को नियमित और समय पर भुगतान हो रहा है। इसके बाद भी भोजन की गुणवत्ता में कमी की जा रही है। तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। गंजपारा स्कूल में किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। गलत ढंग से अफवाह फैलाया गया है।

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