बाड़ियों में होगी ड्रैगन फ्रुट, पपीता,और केले की खेती, 50 मॉर्डन बाड़ियों का चयन, महिला समूहों की बढ़ेगी आमदनी
जिले में ग्रामीणों व महिलाओं को अजीविकामुलक कार्यों से जोड़ा जा रहा है। जिसके तहत अब दुर्ग जिले के 50 गौठानो से सबंधित बाड़ियों को मॉर्डन बाड़ियों के रूप में बदला जा रहा है।
दुर्ग, 23 जुलाई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के तहत, गौठानो में ग्रामीण स्तर पर आर्थिक विकास के प्रयास हो रहें हैं। मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा जिलों का दौरा कर सरकार की फ्लैगशिप योजनाके बेहतर क्रियान्वयन की संभावनाए तलाश रहें है व जरूरी निर्देश भी दे रहें हैं। जिले में ग्रामीणों व महिलाओं को अजीविकामुलक कार्यों से जोड़ा जा रहा है। जिसके तहत अब दुर्ग जिले के 50 गौठानो से सबंधित बाड़ियों को मॉर्डन बाड़ियों के रूप में बदला जा रहा है।

इस तरह विकसित होंगे मॉर्डन बाड़ियां, लगेंगे ड्रैगन फ्रूट
कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने शीघ्र ही 50 बाड़ियों को मॉडर्न बाड़ी के रूप में डेव्हलप करने के लिए उद्यानिकी, कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं। जिस पर उद्यानिकी विभाग के अधिकारीयों ने जिले में संचालित बाड़ियों के साथ नवीन बाड़ियों का चिन्हांकन कर बाड़ियों को समूह में बांटकर ड्रैगन , फ्रुट, पपीता, हाइब्रिड अमरूद, केले जैसे फल और सब्जियों का उत्पादन एक बड़े स्तर पर करने का सुझाव रखा जिस पर कलेक्टर ने सहमति दी। ताकि बाड़ी के कार्य से जुड़े स्व सहायता समूहों की महिलाओं को एक वृहद स्तर पर लाभ पहुंचाया जा सके। इसके लिए समूह की दीदियों को ट्रेनिंग फल एवं सब्जियों के बीज और मार्केट उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रत्येक गौठानो में 6 आजीविका मुलक कार्य
इसके अलावा गौठानों के कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए जिले में गोबर की खरीदी बढ़ाने के लिए पशु पालकों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करने, पंजीकृत करने, गौठानों में कम से कम 6 आजीविका मूलक गतिविधियों को चलाने, नरवा को लेकर बेहतर कार्य करने, छोटे नालों को पुर्नजीवित करने, बारहमसी नालों में मछली पालन व सिंघाड़ा, कमल, मखाने, तरबूज के उत्पादन लेंने की तैयारी भी की जा रही है
सीएम के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा ने किया जिले का दौरा
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा के दौरे के बाद जिले में गौठानों और बाड़ियों की तस्वीर बदली जा रही है। मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने विशेष तौर पर गौठानों में रोजगार मुलक कार्यों को बढ़ावा देने और रिक्त भूमि के सही इस्तेमाल के निर्देश दिए थे । साथ ही बाड़ियों में अतिरिक्त फसलें लगाकर महिलाओं को स्वरोजगार प्रदान करने सुझाव भी दिए
इसके बाद कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने इस सुझाव पर बाड़ियों को मॉडर्न बाड़ी के रूप में तब्दील करने की योजना तैयार की।
महिला समूहों द्वारा किया जा रहा सब्जियों का उत्पादन
दुर्ग जिले में 288 गौठानो का निर्माण किया गया है। जिसमें 10 मॉडल गौठान हैं। इन गौठानो में वर्मीकम्पोस्ट निर्माण के अलावा यहां महिला समूहों को बड़ियों के लिए भूमि उपलब्ध कराया गया है। जिनमे महिलाएं सब्जी उत्पादन कर रहीं हैं। इसके लिए सोलर पंप भी पंचायतों द्वारा लगाया गया है। इन बाड़ियों में ही गौठानों के पशुओं के लिए चारा लगाया जाता है। जिससे पशु खेतों के फसल को नुकसान से बचाया जा सके। इससे पहले भी महिला समूहों द्वारा बाड़ी में ब्रोकली और हल्दी, गोभी, कद्दू की खेती शुरू की गई। इसके साथ ही गौठान में मशरूम उत्पादन बकरी पालन एवं मुर्गी पालन जैसे काम किए जा रहे हैं।सब्जी उत्पादन से महिलाओ को अच्छी आमदनी भी हो रही है।
हरेली त्यौहार से शुरू होगी गौ-मूत्र की खरीदी
राज्य सरकार के निर्देश पर जिले में 4 रूपए प्रति लीटर गौ-मुत्र खरीदी के लिए गौठानों के सेटअप को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। गौ मूत्र कलेक्शन के लिए पशु चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों द्वारा गौठान में कार्यरत स्व-सहायता समूह को विशेष ट्रेनिंग, पीएच और विस्कोसिटी लेवल की जांच के लिए मशीन के प्रबंधन का निर्देश भी कलेक्टर द्वारा दिया गया। इस अवसर पर उन्होंने बड़े पशु पालकों के साथ बातचीत कर एक बेहतर रणनीति बनाने की सलाह भी अधिकारियों को दी।












Click it and Unblock the Notifications