बालोद : दंतेश्वरी शक्कर कारखाने पर मंडरा रहा उत्पादन का संकट, गन्ने की खेती से पीछे हट रहे किसान
प्रतिवर्ष दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाने में 75000 क्विंटल गन्ने की पेराई की जाती थी। लेकिन किसानो को सही समय पर भुगतान न होने से नाराज किसानों ने गन्ना नही लगाने का फैसला कर लिया है,
बालोद, 25 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अब गन्ने की खेती करने वाले किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। जिले में गन्ना की खेती करने से किसान अब कतरा रहे हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण किसानों को गन्ने का सही समय पर भुगतान नही मिलना है। जिसके चलते अब कारखाने में शक्कर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। प्रतिवर्ष दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाने में 75000 क्विंटल गन्ने की पेराई की जाती थी। लेकिन किसानो को सही समय पर भुगतान न होने से नाराज किसानों ने गन्ना नही लगाने का फैसला कर लिया है, गन्ने के अभाव में कारखाने में शक्कर का उत्पादन प्रभावित होगा।

प्रबन्धन ने कारण जानने नही की कोशिश
किसानों का कहना है कि अपनी समस्याओं को लगातार प्रबंधन के सामने रखने के बाद भी प्रबंधन ने गन्ना खेती से किसानों के पीछे हटने का कारण जानने की कभी कोशिश ही नहीं की। प्रबंधन के इस उदासीन रवैये के कारण गन्ना उत्पादकों में निराशा है साथ ही प्रबंधन अपने अव्यवस्था के कारण ही कारखाने के संचालन में नुकसान झेल रहा है।
हर साल कम हो रहा गन्ने का रकबा
गन्ना उत्पादक संघ के जिला उपाध्यक्ष डॉ तेजराम साहू ने बताया कि 2018 में लगभग 300 किसानों ने 2200 हैक्टर में किसानों ने गन्ना की फसल लगाई थी। जो कि गन्ना उत्पादक किसान संघ और प्रशासन में सामंजस्य का परिणाम था। प्रबंधन की अव्यवस्था के चलते हर वर्ष यह गन्ना की रकबा घटते चला गया। प्रशासन की कमजोरी के कारण 2020-21का गन्ना किसानों का भुगतान सही होने से गन्ना उत्पादक किसान अब कतरा रहे हैं।
अन्तर राशि का भुगतान अब तक बाकी
किसानों ने बताया कि इस वर्ष के भी अंतर राशि का भुगतान नहीं होने से खाद, दवाई मजदूर के लिए जरुरत में पैसा न मिलने से किसान कर्ज में चले जाता है। लेकिन फिर भी किसानों को गन्ने का भुगतान सही समय पर नहीं किया जाता यही हालत रही तो जिले में कोई किसान गन्ना लगाने की हिम्मत नहीं करेगा। किसानों को ₹355 प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ने का भुगतान किया जाता है, लेकिन सरकार द्वारा अंतर की राशि भी किसानों को दी जाती है।
तीन साल से नही हुई कोई कार्यशाला
गन्ना उत्पादक किसानों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ गन्ना उत्पादन बढ़ाने के फरमान जारी कर देते है। इससे गन्ना लगाना संभव नहीं है। पिछले तीन सालों में एक भी कोई कार्यशाला नहीं हुई। जिसमें वैज्ञानिक स्तर का कोई किसानों को जानकारी देने के लिए व उनकी समस्या जानने के लिए आया हो, जिले में गन्ना की औसत उत्पादन बढ़ाने के लिए यदि कोई कार्यशाला किसानों के लिए नहीं होगा तो किसान दो फसल धान की तुलना में गन्ना फसल लगाने में अधिक लाभ के बारे में कैसे समझ पायेंगे।
कार्यशाला के माध्यम से नही मिलती पूरी जानकारी
किसानों ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी ब्लाक में हर साल कार्यशाला लगाकर प्रशिक्षण देतें हैं, जहां अधिकारी कर्मचारी से कई तरह के सवाल पूछते हैं। लेकिन उन्हें पूरा जवाब नही मिलता। इस कार्यशाला में भी किसानों की संख्या नगण्य होती जा रही हैं। क्योंकि किसानों को पूरी सूचना व जानकारी नहीं मिलती। यह भी एक बड़ा कारण है।
यह भी है उत्पादन घटने के कारण
दरअसल छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के किसानों को धान के समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बाद किसानों का रुझान धान की फसल लेने की ओर बढ़ा है। किसानों को ₹25 समर्थन मूल्य नगद मिल जाते हैं। जिससे वे अपने आर्थिक बोझ को कम कर सकते हैं,साथ ही अपने परिवार का संचालन भी करते हैं । लेकिन गन्ने की खेती में बीमारी और भुगतान की समस्या बनी रहती है। इसके साथ ही संयंत्र में बॉयलर या अन्य मशीनों के बार-बार खराब होने से संयंत्र में उत्पादन का कार्य प्रभावित होता है। दिसंबर माह में उत्पादन शुरू होने से पहले ही संयंत्र को मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से कारखाने की मशीनें बार-बार खराब होती है।












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