दिल्ली में यमुना को मिलेगा नया जीवन, सरकार का एक्शन प्लान तैयार, इस महीने तक हटेंगे सभी अतिक्रमण
Delhi Yamuna action plan: दिल्ली सरकार ने यमुना नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए एक 45-बिंदुओं वाला एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत नवंबर 2025 तक यमुना के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) से सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह योजना हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा स्वीकृत की गई।
इस कार्य योजना में दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), नगर निगम (MCD), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) जैसी प्रमुख एजेंसियों को शामिल किया गया है।

योजना में क्या है?
DDA को निर्देश दिया गया है कि वह यमुना के किनारे जहां-जहां जरूरी हो, सभी अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाए।
पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बाढ़ क्षेत्रों में कचरा फेंकने, अवैध खेती और झुग्गियों जैसे अतिक्रमण आम तौर पर देखे जाते हैं।
हाल के वर्षों में DDA ने 224 एकड़ बाढ़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर सार्वजनिक ग्रीन स्पेस "असीता" जैसे क्षेत्रों का विकास किया है।
अप्रैल में DDA ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) को बताया था कि उसने यमुना वनस्थली परियोजना के तहत वज़ीराबाद बैराज से कश्मीरी गेट ISBT के बीच 24 एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।
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कई अड़चनें भी मौजूद
अधिकारियों ने माना कि अवैध कब्जाधारियों का विरोध और फ्लडप्लेन की सटीक सीमांकन की कमी के कारण कार्रवाई में बाधाएं आती हैं।
DDA के सर्वे के मुताबिक, दिल्ली के यमुना फ्लडप्लेन का दो-तिहाई हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है।
नालों से भी हटेगा अतिक्रमण
सभी ड्रेनों और स्टॉर्मवॉटर नालों से अतिक्रमण हटाने का भी निर्देश दिया गया है।
MCD, NDMC और DDA को स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि MCD और सिंचाई विभाग ड्रेन किनारे बसे अवैध निर्माण पर कार्रवाई करेंगे।
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₹9,000 करोड़ का आवंटन किया गया
सभी यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं को 10 कार्य प्रमुखों में समेकित किया गया है, जिनमें ड्रेनेज, सीवेज, ठोस कचरा प्रबंधन, पारिस्थितिक प्रवाह और प्रवर्तन शामिल हैं।
यमुना का 52 किलोमीटर लंबा हिस्सा दिल्ली से गुजरता है, जिसमें वज़ीराबाद से ओखला तक का 22 किलोमीटर हिस्सा सबसे प्रदूषित है, जिस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बीजेपी सरकार द्वारा यमुना की सफाई को प्राथमिकता में रखा गया है और पहले बजट में जल और सीवरेज क्षेत्र के लिए ₹9,000 करोड़ का आवंटन किया गया था।












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