Delhi Pollution: आखिर क्यों प्रदूषित हो रही है दिलवालों की 'दिल्ली'? पढ़ें वनइंडिया Exclusive
नई दिल्ली,12 नवंबर। (Exclusive) दिवाली के बाद से दिल्ली प्रदूषण की मार सह रहा है। राजधानी की आबो-हवा जहरीली हो गई है क्योंकि आज भी दिल्ली की Air Quality बेहद 'खराब श्रेणी' में है। सफर (SAFAR) के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 360 पर है जो कि 'बेहद खराब श्रेणी' में आता है। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्यों पर दोष मढ़ रही है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय का कहना है कि 'पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को मिलाकर अब तक 45,000 जगहों पर पराली में आग लगाई गई है, इससे दिल्ली के प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।'

'दिल्ली के प्रदूषण के लिए दिल्लीवासी भी जिम्मेदार हैं'
हालांकि ये पहली बार नहीं है कि दिल्ली इस तरह की परेशानी से जूझ रही है। अगर पिछले 5 सालों पर नजर दौड़ाएं तो दिल्ली-एनसीआर लगातार इस घातक समस्या से ग्रसित है। हालांकि 'सफर' ने अपनी पहले की एक रिपोर्ट में कहा था कि 'दिल्ली के प्रदूषण के लिए दिल्लीवासी भी जिम्मेदार हैं', वो प्रदूषण बढ़ाने वाली चीजों का प्रयोग बहुतायत में करते हैं इसलिए दिल्ली की आबो-दवा दमघोंटू होती जा रही है।

'हवा को विषैली बनाने में बाहरी कारक जिम्मेदार'
लेकिन IIT कानपुर के प्रोफेसर एस एन त्रिपाठी के नेतृत्व में की गई रिसर्च 'Real Time Source Apportionment in Delhi' का कहना है कि राजधानी की हवा को प्रदूषित करने के पीछे
कुछ बाहरी कण भी जिम्मेदार हैं,जो कि दिलवालों की 'दिल्ली' को सबसे ज्यादा दूषित कर रहे हैं। आपको बता दें कि ये शोध अपने आप में अनोखा है क्योंकि इसमें पहली बार दिल्ली की हवा को विषैली बनाने में जो बाहरी कारक जिम्मेदार हैं, उनके बारे में बताया गया है।

PM10 और PM2.5 का आंकलन किया गया
रिसर्च ये भी बताती है कि ये बाहरी तत्व किस तरह से और कितनी मात्रा में राजधानी को प्रदूषित कर रहे हैं। शोध में दिल्ली में हवा के बहाव पर ध्यान दिया गया और साल 2018 और साल 2019 की सर्दियों में PM10 और PM2.5 का आंकलन किया गया और फिर दोनों सालों की तुलना करके निष्कर्ष निकाला गया।
राजधानी की हवा को दम घोंटू बनाते हैं ये तत्व
रिसर्च में साफ है कि पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की ओर आ रही नार्थ-वेस्ट हवाएं अपने साथ सीसा, स्टैनम, सेलेनियम, क्लोरीन, ब्रोमीन और सेलेनियम को और नेपाल -उत्तर प्रदेश से आने वाली पूर्व की हवाएं कॉपर, कैडमियम, और सल्फर को, जबकि क्रोमियम, निकेल, और मैंगनीज नार्थ ईस्ट से दिल्ली तक पहुंचते हैं, जो कि राजधानी की हवा को दम घोंटू बनाते हैं।
सर्दी में क्लोरीन की मात्रा बढ़ जाती है
शोध कहता है कि गर्मी में दिल्ली की हवा में क्लोरीन की मात्रा कम रहती है, जबकि जाड़े में बढ़ जाती है। वहीं लेड, क्रोमियम, आर्सेनिक, कॉपर, मैगनीज जैसे भारी धातूओं का कंसंट्रेशन भी सर्दी में बढ़ जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।

'प्रदूषण के लिए 40 प्रतिशत पराली जिम्मेदार'
इस बारे में कानपुर के प्रोफेसर एसएन त्रिपाठी ने वनइंडिया हिंदी से Exclusive बातचीत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली को प्रदूषित करने में अगर 40 प्रतिशत पराली जिम्मेदार है तो 60 प्रतिशत दिल्ली के अंदर के कारण भी दोषी हैं। बेशक दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्र राजधानी की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं लेकिन दिल्लीवासियों को भी प्रदूषण को बढ़ाने वाले तत्वों को दूर करना होगा। दिल्ली में सबसे बड़ा प्रदूषण वहां का ट्रैफिक है, जिसमें भी दो कारण हवा को दूषित करने के लिए जिम्मेदार हैं, ये दो कारण हैं 'पाइप' और 'टायर'।
दिल्ली में हर वक्त हवा की स्थिति में परिवर्तन होता है
जब दिल्ली में तापमान गिरता है और हवाओं की गति कम होती है तो इन घातक पदार्थों की संख्या बढ़ जाती है जो कि दिल्ली को स्मोग की गिरफ्त में ले लेते हैं। दिल्ली में हर वक्त हवा की स्थिति में परिवर्तन होता है इसलिए प्रदूषित कणों का पहले से आंकलन करना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है।

क्या होते हैं PM10 और PM 2.5
आपको बता दें कि PM10 या पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। जो कि वायु में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण होता है। इन्हें नग्न आंखों से देखा नहीं जा सकता है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रक्शन और कूड़ा या पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है, जो कि स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।

क्या होता है AQI
AQI एक संख्या है जिसका उपयोग सरकारी एजेंसियों द्वारा वायु प्रदूषण के स्तर को बताने के लिए करती हैं।
यह है पैमाना
- 0 से 50 के बीच एक्यूआई 'अच्छा',
- 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक' ,
- 101 और 200 को 'मध्यम',
- 201 और 300 को 'खराब',
- 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब'
- 401 और 500 को अति 'गंभीर'












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