Delhi Smog: क्या दिल्ली को देश की राजधानी कहलाना चाहिए? प्रदूषण को देकर फूटा थरूर का गुस्सा
Delhi Smog:कांग्रेस पार्टी के अनुभवी राजनेता और तिरुवनंतपुरम के प्रतिनिधि शशि थरूर ने हाल ही में दिल्ली में चल रहे वायु प्रदूषण संकट, भारत की राष्ट्रीय राजधानी के रूप में इसकी स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने दिल्ली में वायु गुणवत्ता की भयावह स्थिति को उजागर करने के लिए एक्स (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) का सहारा लिया।

जिसमें उन्होंने कहा कि इसका प्रदूषण स्तर दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर ओफाका से लगभग पांच गुना अधिक है। थरूर ने इस स्थिति को "अनुचित" करार दिया और पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती समस्या के बावजूद केंद्र सरकार की निष्क्रियता की खुलकर आलोचना की।
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार वर्षों से इस दुःस्वप्न को देख रही है और इसके बारे में कुछ नहीं करती है," शशि थरूर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शहर की वायु गुणवत्ता में काफी गिरावट आई है, जिससे इसके निवासियों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने बताया कि दिल्ली हर साल नवंबर से जनवरी तक तीन महीने के लिए "निवास के लायक नहीं" हो जाती है और बाकी समय "बमुश्किल रहने लायक" रहती है, जिससे उन्हें देश की राजधानी के रूप में इसकी उपयुक्तता पर सवाल उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को अन्य हितों की तुलना में सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारे नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए, और इस संकट से निपटने में तत्परता की कमी देखना निराशाजनक है।"
सरकार की प्रतिक्रिया जांच के दायरे में
शशि थरूर ने बताया कि कई चर्चाओं और रिपोर्टों के बावजूद ठोस कार्रवाई अभी भी कम ही हुई है। उन्होंने अधिकारियों से उत्सर्जन पर सख्त नियम लागू करने और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया। सांसद का मानना है कि निर्णायक कदम उठाए बिना स्थिति और खराब होती जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अन्य शहरों ने भी अभिनव समाधानों के माध्यम से अपने प्रदूषण स्तर को सफलतापूर्वक प्रबंधित किया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
दिल्ली में वायु की खराब होती गुणवत्ता के कारण लोगों में सांस संबंधी बीमारियों में वृद्धि हुई है। शशि थरूर ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों जैसे कमजोर समूहों को विशेष रूप से जोखिम है। उन्होंने स्वच्छ वायु सुनिश्चित करके इन समूहों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
सहयोगात्मक प्रयासों का आह्वान
शशि थरूर ने सरकारी निकायों और नागरिकों दोनों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उनका मानना है कि प्रदूषण संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उनका तर्क है कि एक साथ काम करके, सभी के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाना संभव है।
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