राकेश टिकैत बोले- पराली जलाने से नहीं होता ज्यादा प्रदूषण, खलनायक ठहराने वाले किसानों से माफी मांगें
नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सरकार के 'पराली जलाने से प्रदूषण हो रहा है' बयान पर पलटवार किया है। आज राकेश टिकैत ने अपने ट्विटर हैंडिल पर लिखा कि, पराली जलाने से अधिक वायु प्रदूषण नहीं होता। इस बात को सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं, क्योंकि 10% प्रदूषण ही पराली से होता है, वह भी डेढ़-दो माह के लिए।
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राकेश टिकैत ने कहा कि, किसानों को प्रदूषित के लिए जिम्मेवार बताने वाले या उन्हें खलनायक ठहराने वाले किसानों से मांफी मांगें।
दरअसल, बीते रोज सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति को लेकर सुनवाई की थी। जहां दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। उसे देखने के बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई और कहा कि, आपने हलफनामे में प्रदूषण का सारा दोष पड़ोसी राज्यों के किसानों पर मढ़ दिया है, ये बिल्कुल गलत है। ऐसा लगता है कि आप इससे बचकर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार का हलफनामा किसानों को कोसने के बारे में है कि, इसका एकमात्र कारण पराली जलाना है। हकीकत ये है कि ये सच नहीं है, पराली जलाना प्रदूषण का एक कारण है, ना कि एकमात्र कारण। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने तो नगर आयुक्त को भी इसका जिम्मेदार बता दिया है। आपकी ओर से दिए गए ये बेहद कमजोर तर्क हैं। इस तरह के तरह के बहाने आप हमें एक तरह से राजस्व का ऑडिट करने और विज्ञापनों पर हो रहे खर्च करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो प्रदूषण पर काबू के लिए पूर्ण लॉकडाउन लगाने को तैयार है। दिल्ली सरकार ने कहा कि, यह अधिक सार्थक होगा अगर पड़ोसी राज्यों के अंतर्गत आने वाले एनसीआर में भी लॉकडाउन लगाया जाए, क्योंकि हवा को बाउंड्री से नहीं रोका जा सकता है।'












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