North South Block National Museum: नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनेंगे म्यूजिम, जानें क्या है इसका सौ साल पुराना इतिहास
North South Block National Museum: भारतीय राजनीति और केंद्रिय प्रशासन का Heart Beat कहे जाने वाले नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अब एक नए अवतार में दुनिया के सामने होंगे। केंद्र सरकार ने इन ऐतिहासिक इमारतों को 'युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय' (Yuge Yugeen Bharat National Museum) में बदलने का निर्णय लिया है।
यह न केवल भारत के गौरवशाली अतीत को सहेजेगा, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय भी बनेगा। रायसीना हिल पर स्थित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की इमारतें सिर्फ पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की गवाह हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में नए PMO परिसर 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन किए जाने के बाद अब इन इमारतों को 'पब्लिक स्पेस' यानी संग्रहालय में बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जानें नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का 100 साल का इतिहास...
क्या था नॉर्थ और साउथ ब्लॉक?
नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक, राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने रायसीना हिल पर स्थित दो विशाल और भव्य इमारतें हैं। आज़ादी के बाद से ये इमारतें भारत की शासन व्यवस्था का केंद्र रही हैं। दशकों तक ये दोनों इमारतें भारत सरकार के सबसे शक्तिशाली कार्यालयों में से एक रही हैं।
साउथ ब्लॉक (South Block) में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय स्थित रहे। वहीं नॉर्थ ब्लॉक (North Block) जहां गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते थे। ये इमारतें 'सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' (केंद्रीय सचिवालय) का हिस्सा हैं और राष्ट्रपति भवन के दोनों ओर स्थित हैं।
कब और किसने बनाया था North Block South Block?
इन इमारतों का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में हुआ था। इन जुड़वां इमारतों का डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार सर हर्बर्ट बेकर (Sir Herbert Baker) ने तैयार किया था। जहां एडविन लुटियंस ने राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं बेकर ने इन सचिवालय भवनों और पुराने संसद भवन का निर्माण किया।
जहां वायसरॉय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन), किंग्सवे (अब राजपथ/कर्तव्य पथ) और इंडिया गेट का डिजाइन एडविन लुटियन ने किया, वहीं नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और गोलाकार संसद भवन का डिजाइन तैयार किया।
इनका निर्माण 1911 से 1930 के बीच हुआ और 1931 में दिल्ली को आधिकारिक राजधानी के रूप में उद्घाटन के समय ये पूरी तरह तैयार थीं। वास्तुकला शैली के हिसाब से भी ये ब्लॉक बेहद महत्तवपूर्ण रही हैं। इन इमारतों में मुगल, राजपूताना और यूरोपीय शैली का मिश्रण हैं। इनमें लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया है, जो राजस्थान से लाए गए थे।
What is Yuge Yugeen Bharat Museum: क्या है 'युगे युगीन भारत राष्ट्रीय म्यूजियम?
सरकार की योजना के मुताबिक, इन दोनों इमारतों में भारत के 5,000 साल के इतिहास को दो मुख्य कालखंडों में विभाजित किया जाएगा।
साउथ ब्लॉक संग्रहालय:
यहां 1857 से पहले की भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और औपनिवेशिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर से लेकर 1857 की क्रांति तक की पृष्ठभूमि को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाएगा।
नॉर्थ ब्लॉक संग्रहालय:
इसमें 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता संग्राम का विस्तृत इतिहास होगा। क्रांतिकारियों, आंदोलनों, नेताओं, दस्तावेजों और दुर्लभ स्मृतियों के जरिए आज़ादी की लड़ाई की कहानी सामने आएगी।
North South Block की विरासत और इतिहास को लेकर जारी है विवाद
इस बड़े बदलाव को लेकर देश में दो तरह के विचार पर बहस चल रही है। विपक्ष और कुछ इतिहासकारों का कहना है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना से दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं पर्यावरणविदों ने हरित क्षेत्र और विरासत संरक्षण पर सवाल उठाए हैं।
उनका तर्क है कि इससे दिल्ली की आत्मा खत्म हो जाएगी। 100 साल पुरानी इन जटिल इमारतों को आधुनिक संग्रहालय में बदलना भी एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है।
वहीं सरकार का कहना है कि ये इमारतें 'औपनिवेशिक मानसिकता' का प्रतीक थीं, जहाँ आम जनता का प्रवेश वर्जित था। अब इन्हें संग्रहालय बनाकर जनता को समर्पित किया जा रहा है, जो 'लोकतंत्र' की सच्ची भावना है।
कहां जाएंगे मंत्रालयों के कर्मचारी?
वर्तमान में यहां कार्यरत 25,000 से अधिक कर्मचारियों को राजपथ (कर्तव्य पथ) के दोनों ओर बन रही 10 नई भव्य आठ मंजिला इमारतों (Common Central Secretariat) में स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को संग्रहालय में बदलने से ये इमारतें अब केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि आम लोग भी यहां आकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम और शासन व्यवस्था के इतिहास को करीब से देख सकेंगे।












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