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Delhi Fire: आग ने कैसे निगली 43 लोगों की जिंदगी, सामने आई बड़ी लापरवाही

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दिल्ली। राजधानी दिल्ली की अनाज मंडी में चल रही एक फैक्ट्री में रविवार की सुबह भीषण आग लग गई, जिसमें 43 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद बड़ी संख्या में दमकलकर्मी पहुंचे और राहत व बचाव का कार्य शुरू किया। जानकारी के अनुसार, आग लगने की वजह से बिल्डिंग में काफी धुंआ भर गया, जिसकी वजह से लोग सांस नहीं पा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने बताया कि लोगों का दम घुटने की वजह से 43 लोगों की मौत हो गई। वहीं, अस्पताल में भर्ती कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल की 30 गाड़‍ियां आग बुझाने के काम में लगी थीं। आइये जानते हैं कि यह अग्निकांड इतना भयावह कैसे हो गया...

    Delhi Fire : आखिर कैसे Death Chamber में तब्दील हो गई फैक्ट्री ? |वनइंडिया हिंदी
    दमकल विभाग को नहीं मिली थी सटीक सूचना

    दमकल विभाग को नहीं मिली थी सटीक सूचना

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, दिल्ली फायर सर्विस के डेप्युटी चीफ फायर ऑफिर सुनील चौधरी के हवाले से बताया गया है कि दमकल विभाग को आग लगने की सटीक जानकारी नहीं मिली। उन्हें तो केवल यह बताया गया कि एक इमारत में आग लगी है। सूचना देने वालों ने यह नहीं बताया कि वहां कई लोग फंसे हैं। अधिकारी के मुताबिक, यदि इस बात की जानकारी होती कि इतनी बड़ी संख्या में लोग भी इमारत में फंसे हैं तो हम और तैयारी के साथ मौके पर पहुंचते। हालांकि कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझा दिया गया है और मौके पर 15 लोगों को बचाया गया है। राहत कार्य अभी भी जारी है।

    संकरा था इलाका

    संकरा था इलाका

    जानकारी के अनुसार, रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी में रविवार की सुबह तकरीबन 5 बजे यह हादसा हुआ। यहां जिस बिल्डिंग में यह आग लगी, उसमें अंदर प्लास्टिक का काम चल रहा था। जिन तीन घरों में आग लगी वह तीनों ही घर आपस में जुड़े हुए थे, जिसकी वजह से इमारत में आग काफी भीषण तरह से बढ़ गई और पूरी बिल्डिंग आग की चपेट में आ गई। जिस जगह यह आग लगी है वह इलाका इतना संकरा था कि यहां दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में काफी दिक्कत हो रही थी।

    नहीं था आसपास पानी का साधन

    नहीं था आसपास पानी का साधन

    गलियां बहुत संकरी थी और आसपास पानी का साधन भी नहीं था, जिससे दमकल कर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। चूंकि, घटनास्‍थल पर एक बार में एक ही गाड़ी भीतर जा सकती थी इससे राहत कार्यों में भी देर हुई। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार घंटे से ज्यादा वक्त से राहत कार्य जारी है। यही नहीं इसके लिए एनडीआरएफ की भी मदद लेनी पड़ी है।

    फैलता गया धुएं का गुबार, दम तोड़ते गए लोग

    फैलता गया धुएं का गुबार, दम तोड़ते गए लोग

    कुछ प्रत्‍यक्षदर्शियों के मुताबिक, आवासीय इलाके में चलाई जा रही इस फैक्ट्री में आग लगने के समय 50 से अधिक लोग थे। उक्‍त तमाम परिस्थितियों के कारण राहत कार्य तेजी से नहीं चल सका, जिस वजह से धुएं का गुबार फैलता गया और लोग बेहोश होने लगे। चीफ फायर अधिकारी ने बताया कि 50 से ज्यादा लोग निकाले गए हैं। जिन्‍हें निकालने में देर हो गई है उनके बचने की संभावना कम है। घटना की तस्‍वीरों को देखने से साफ जाहिर होता है कि कैसे लोगों को निकलने तक का मौका नहीं मिल पाया होगा।

    बचाओ-बचाओ की आ रही थी आवाजें

    बचाओ-बचाओ की आ रही थी आवाजें

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दमकल विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जब दमकलकर्मी आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे तो अंदर बेहद अंधेरा था। धुएं से भीतर बेहद खराब हालात थे। जगह जगह स्कूल बैग, बोतलें और कई अन्य सामान बिखरे पड़े थे। कई कमरों के भीतर से बचाओ-बचाओ की आवाजें आ रही थीं।

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    English summary
    How fire ignited 43 lives, negligence revealed
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