मोदी सरकार ने फसलों के रेट बढ़ाए, किसान नेता चढ़ूनी बोले- इससे ज्यादा तेज तो महंगाई बढ़ रही है
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा रबी सीजन की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के फैसले पर किसान संगठनों ने खुशी जताई है। हालांकि, कई किसान नेता इस पर असंतुष्ट भी नजर आ रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े रहे हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी का बयान आया है। चढ़ूनी का कहना है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने मसूर और सरसों को छोड़कर बाकी फसलों का रेट 2% बढ़ाया है। जबकि इससे ज्यादा तो महंगाई बढ़ रही है। महंगाई की दर हर साल 7-8% बढ़ रही है। इसका मतलब है कि हमें 5% का नुकसान लगातार हुआ है। उन्होंने कहा कि, हर 7 साल में हमारी कमाई आधी हो जाती है। यानी किसान नुकसान में ही हैं।

गुरनाम सिंह ने कहा कि, अच्छी बात यह रही कि पिछले साल सरसों एमएसपी से महंगी बिकी है। उन्होंने कहा कि, सरकार को सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करनी चाहिए, ताकि किसानों को फायदा हो। चढ़ूनी ने पिछले दिनों कहा था कि, कृषि कानूनों को रद्द करने से किसानों की समस्या पर विराम नहीं लगेगा, बल्कि सरकार को और भी कदम उठाने होंगे।
गौरतलब है कि, चढ़ूनी किसान आंदोलनकारियों से कांग्रेस शासित प्रदेश पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने की अपील करते रहे हैं। 'मिशन पंजाब' के बारे में सार्वजनिक रूप से घोषणा करने, लोगों से मिलने और किसानों को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें जुलाई महीने में संयुक्त मोर्चे से निलंबित भी कर दिया गया था।

निलंबन से खफा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम चढ़नी ने अगस्त महीने में संयुक्त किसान मोर्चे से अलग होने का ऐलान कर दिया। साथ ही अपने साथ भेदभाव करने का भी आरोप भी लगाया। दरअसल, पंजाब के ही चार संगठनों द्वारा चढूनी के नेतृत्व में सक्रियता दिखाना संयुक्त किसान मोर्चे के कुछ नेताओं को रास नहीं आया तो इन चारों संगठनों के खिलाफ कार्रवाई से चढूनी बिफर गए। उन्होंने किसान नेताओं योगेंद्र यादव और शिवकुमार कक्का पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, संयुक्त किसान मोर्चा में पहले दिन से मेरे साथ भेदभाव हो रहा है। कई घटनाएं ऐसी हुई, जब मुझे बाहर करने की कोशिश की गई। लेकिन जब वही गतिविधि किसी और ने की तो उनके खिलाफ मोर्चा ने कोई एक्शन नहीं लिया। पंजाब की चार जत्थेबंदी हमारे साथ जुड़ी थीं, जो डेरा बाबा नानक से बड़ा जत्था लेकर आए थे।

चढ़ूनी पर संयुक्त किसान मोर्चा ने जुलाई के महीने में कार्रवाई की थी। जिसके बाद केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी और सिंघू बार्डर पर चल रहा किसान संगठनों का आंदोलन बिखराव के कगार पर पहुंच गया। चढ़ूनी ने संयुक्त मोर्चा से किनारा करते हुए मोर्चा से अलग होने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने किसान नेताओं योगेंद्र यादव और शिवकुमार कक्का पर निशाना साधा।












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