किसान संगठनों का फिर "चलो दिल्ली" का आह्वान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दिखाएंगे ताकत

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार के 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ सालभर से चल रहे किसान संगठनों के आंदोलन को नई धार देने के लिए एक बार फिर 'चलो दिल्ली' का आवाह्न किया गया है। संयुक्‍त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान दिल्‍ली कूच की तैयारी कर रहे हैं। किसान आंदोलनकारियों की यह योजना गुरुवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई से पहले बनी है। जिसके तहत, विरोध-प्रदर्शनों को दिल्‍ली में फिर से शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

Farmer unions attempt to renew protest As ‘Chalo Delhi’, ahead of crucial SC hearing

'चलो दिल्ली' का आह्वान किया जा रहा
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कई किसान यूनियनों ने सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों को बढ़ाने का फैसला लिया है, जिसमें उनके द्वारा अपने आंदोलन के सुदृढीकरण की बातें की जा रही हैं। किसान नेताओं ने सभी राज्यों के किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर डटे प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने के लिए कहा है। जानकारी के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे कृषि संघों के एक छत्र निकाय संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया है।

हाल ही में संयुक्‍त किसान मोर्चा ने देश भर में 'रेल रोको' का आवाह्न किया था, जो काफी हद तक सफल रहा। एसकेएम के आह्वान ने पंजाब और हरियाणा में ट्रेन संचालन को खासा प्रभावित किया। वहीं, उनके आवाह् को अन्य उत्तरी राज्यों से भी समर्थन मिला। बहरहाल, गुरुवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई के मद्देनजर, केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर सुदृढीकरण का आह्वान किया है।

Farmer unions attempt to renew protest As ‘Chalo Delhi’, ahead of crucial SC hearing

गौरतलब हो कि, इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह 21 अक्टूबर को जांच करेगा कि क्या विरोध का अधिकार पूर्ण था और यह भी तय करेगा कि जब विरोध का मुद्दा अदालत में है तो किसानों को सड़कों पर उतरने का अधिकार है या नहीं। शीर्ष अदालत ने एक किसान संगठन से पूछा था कि, वह किसके खिलाफ विरोध करना चाहता है, यह देखते हुए कि कानून लागू नहीं हैं और उस पर रोक लगा दी गई है।

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि जब लखीमपुर खीरी जैसी घटनाएं होती हैं, तो "कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता" और कहा कि, वह इस बात की जांच करेगी कि क्या एक पक्ष जो पहले से ही संवैधानिक अदालत से निदान करवाने की मांग कर चुका है, उसे सड़कों पर एक साथ विरोध करने का पूर्ण अधिकार है? और है तो क्‍यों?

Farmer unions attempt to renew protest As ‘Chalo Delhi’, ahead of crucial SC hearing

जस्टिस खानविलर ने किसान संगठन, किसान महापंचायत द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था, "आप कह रहे हैं कि आप विरोध करना चाहते हैं, तो क्यों विरोध करें? कोर्ट ने एक्ट पर रोक लगा दी है। केंद्र ने कहा है कि इसे अभी लागू नहीं किया जाएगा।, "
खानविलर की इस बेंच के समक्ष जस्टिस सीटी रविकुमार भी मौजूद थे, तब किसान संगठन की ओर से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी गई थी। उधर, केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि "ऐसे किसान आंदोलन नहीं" हो सकता, क्योंकि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को नहीं होने दिया जा सकता।

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