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E-Air Taxi Project: ट्रैफिक जाम से राहत! क्या है ई-एयर टैक्सी प्रोजेक्ट? कैसे बदलेगा Delhi-NCR का सफर

Delhi E-Air Taxi Project: दिल्ली-एनसीआर में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से परेशान लोगों के लिए भविष्य में सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) करने वाली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी यानी ई-एयर टैक्सी को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि यह तकनीक घंटों की यात्रा को मिनटों में बदल सकती है।

खास बात यह है कि ये ई-एयर टैक्सी इमारतों की छतों से उड़ान भरेंगी, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और समय की बड़ी बचत संभव हो सकेगी।

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What is Electric Air Taxis Project: क्या है पूरा ई-एयर टैक्सी प्रोजेक्ट?

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ई-एयर टैक्सी एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (AAM) का हिस्सा है। ये इलेक्ट्रिक पावर से चलने वाली छोटी एयर टैक्सियां होंगी, जो वर्टिकल तरीके से टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकेंगी। यानी इन्हें पारंपरिक रनवे की जरूरत नहीं होगी। इन टैक्सियों को शहर के भीतर छोटी दूरी के तेज़ सफर के लिए डिजाइन किया जा रहा है, खासकर उन रूट्स पर जहां सड़क से जाने में घंटों लग जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ई-एयर टैक्सी:

एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को तेज बनाएंगी

बिजनेस हब्स, अस्पताल और टेक पार्क को जोड़ेंगी

ट्रैफिक जाम से बचने का विकल्प देंगी

Urban Air Mobility से गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक पायलट कॉरिडोर का प्लान

उद्योग परिसंघ कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की एडवांस्ड एयर मोबिलिटी पर जारी रिपोर्ट में ई-एयर टैक्सी के लिए एक पायलट कॉरिडोर मॉडल का सुझाव दिया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाला कॉरिडोर शुरू करने की सिफारिश की गई है। CII का मानना है कि इस रूट पर सफल परीक्षण के बाद इसे दिल्ली-एनसीआर के अन्य हिस्सों और आगे चलकर देश के बड़े शहरों तक बढ़ाया जा सकता है।

CII की रिपोर्ट में क्या कहा गया? किसने जारी की रिपोर्ट?

यह अहम रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से जारी की। इस मौके पर DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) के अधिकारियों ने इसे भारत में भविष्य के शहरी परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बताया।

CII की रिपोर्ट के मुताबिक ई-एयर टैक्सी से शहरों में मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव कम होगा, सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी और ऑपरेशन टाइम में बड़ी कटौती होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ई-एयर टैक्सी शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम का सपोर्टिंग मोड बन सकती हैं, जिससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवागमन ज्यादा सुगम होगा।

छतें बनेंगी वर्टिपोर्ट, खुलेगा कमाई का नया जरिया

CII की रिपोर्ट में इमारतों की छतों को वर्टिपोर्ट के रूप में इस्तेमाल करने पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत कमर्शियल हब, अस्पताल, टेक पार्क और रेजिडेंशियल टावर की छतों से ई-एयर टैक्सी का टेक-ऑफ और लैंडिंग संभव होगी। इससे न सिर्फ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि बिल्डिंग ओनर्स के लिए छतें कमाई का नया जरिया भी बन सकती हैं।

पर्यावरण के लिहाज से कितना फायदेमंद?

ई-एयर टैक्सी पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा। हालांकि, कम ऊंचाई पर उड़ान होने के कारण सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा माना गया है। इसके लिए सख्त रेगुलेशन, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी होगी।

CII की रिपोर्ट में ई-एयर टैक्सी के साथ-साथ ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स को भी अहम बताया गया है। खास तौर पर 50 से 100 किलोमीटर की रेंज, मेडिकल सप्लाई और जरूरी कार्गो को तेजी से पहुंचाने के लिए ड्रोन ऑपरेशन की सिफारिश की गई है। इसके लिए पहले से टेक-ऑफ और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने पर जोर दिया गया है।

किसे और कैसे मिलेगा फायदा?

अगर यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतरता है तो ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स को ट्रैफिक से राहत मिलेगी। बिजनेस यात्रियों का समय बचेगा और मरीजों और इमरजेंसी सेवाओं को तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी। रियल एस्टेट और बिल्डिंग ओनर्स को अतिरिक्त कमाई होगी और सबसे खास बात शहरों को प्रदूषण और भीड़ से राहत मिल सकती है।

कहां से होगी शुरुआत?

रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि ई-एयर टैक्सी को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले पायलट जोन तय किए जाएं। रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग हो और रेगुलेटरी प्रोटोटाइपिंग के जरिए सुरक्षा और तकनीक को परखा जाए। अगर ई-एयर टैक्सी का यह प्लान सफल होता है, तो दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगरों में सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। ट्रैफिक जाम से राहत, समय की बचत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के साथ ई-एयर टैक्सी शहरी आवागमन का अगला बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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