Delhi School Fees: पैरेंट्स के लिए राहत या नई परेशानी? दिल्ली स्कूल फीस कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Delhi School Fees: दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर लाया गया नया कानून सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर है। रेखा गुप्ता सरकार के 'दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और नियमन) एक्ट, 2025' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन इसे लागू करने का समय और तरीका चिंता पैदा करता है।
कोर्ट का मानना है कि मौजूदा अकैडमिक सेशन के बीच इस कानून को लागू करना न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि इससे निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर अनावश्यक प्रशासनिक और वित्तीय दबाव भी पड़ सकता है।

फीस नियंत्रण से कोर्ट को आपत्ति नहीं (Delhi School Fees Law)
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। बेंच ने साफ किया कि कोर्ट स्कूल फीस को नियंत्रित करने के विचार के खिलाफ नहीं है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यह कानून जनहित में है और इसकी मंशा से कोर्ट पूरी तरह सहमत है। लेकिन परेशानी इस बात की है कि इसे जिस तरह और जिस वक्त लागू किया जा रहा है, वह खुद कई समस्याओं को जन्म दे सकता है।
चलते सेशन में फीस तय करना कितना सही? (Delhi School Fee Regulation)
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि जब मौजूदा शैक्षणिक सत्र पहले से चल रहा है, तो बीच में फीस निर्धारण कैसे किया जा सकता है। जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जुलाई तक अगर इस तरह की व्यवस्था लागू होनी थी, तो तब तक इसकी मंजूरी मिल जानी चाहिए थी। अब समय निकल चुका है और ऐसे में जल्दबाजी से पूरा सिस्टम उलझ सकता है।
स्कूलों पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के कानून को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू करने से निजी स्कूलों के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं। अचानक नियम बदलने से स्कूलों को न सिर्फ प्रशासनिक उलझनों का सामना करना पड़ेगा, बल्कि उनकी वित्तीय योजना भी बिगड़ सकती है। कोर्ट ने चेताया कि जल्दबाजी में बनाए गए संस्थान या व्यवस्थाएं लंबे समय तक टिक नहीं पातीं।
याचिकाएं किसने दायर की हैं?
इस कानून को चुनौती देते हुए निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिकाओं में कहा गया है कि फीस नियमन के नियम और उन्हें मौजूदा अकैडमिक सेशन में लागू करने का फैसला अव्यवहारिक है और इससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
27 जनवरी को अगली सुनवाई (Delhi School Fees Update)
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय की है। तब तक यह साफ नहीं है कि कानून को मौजूदा सत्र में लागू किया जाएगा या सरकार को इसमें बदलाव करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है। स्कूल फीस पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन कानून सही वक्त और सही तरीके से लागू हो, तभी उसका फायदा छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचेगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला उलटा असर भी डाल सकता है।
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