Delhi: बेतहाशा दर्द से पीड़ित मरीज को LNJP अस्पताल ने टेस्ट के लिए दी 2024 की तारीख, पेशेंट पहुंचा कोर्ट
दिल्ली के मतदाता पहचान पत्र रखने वाले व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलता है जबकि अन्य राज्यों के लोगों को प्रतिक्षा करनी पड़ती है।

Delhi: जरा सोचिए किसी को घुटने में दर्द अभी है और उसे तुरंत MRI करवाने की सलाह डॉक्टरों ने दी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उसकी इलाज कर सकें लेकिन अस्पताल उस मरीज को आज या कल की MRI Test की डेट ना देकर पूरे दो साल बाद की तारीख दे तो इसे आप क्या कहेंगे? जाहिर है आपके मुंह से निकलेगा, ये क्या बे सिर-पैर की हरकत है, दिमाग खराब हो गया है क्या?... तो हां..दिमाग में ही कुछ लोचा लगता है क्योंकि ये हरकत हुई है मूलरूप से बिहारी लेकिन दिल्ली में रहने वाले गुलाम महबूब के साथ, जिन्हें दिल्ली के लोक नायक अस्पताल की ओर से एमआरआई टेस्ट की तारीख 15 जुलाई 2024 दी गई है और इसके पीछे कारण ये बताया गया है कि उनके आईडीकार्ड पर दिल्ली के बजाए बिहार का आवासीय स्थायी पता है।
दरभंगा के निवासी के साथ भेदभाव!
फिलहाल अस्पताल की इस हरकत पर दरभंगा के मोहम्मदपुर निवासी गुलाम महबूब ने अब कोर्ट में उसके खिलाफ याचिका दायर की है। इसके बारे में उनके अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने मीडिया को जानकारी दी, बता दें कि इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।
MRI Test की तारीख 15 जुलाई 2024 को
अशोक अग्रवाल ने कहा कि 'एक साल पहले 49 वर्षीय गुलाम महबूब दिल्ली के सीताराम बाजार में मिनी ट्रक से सामान उतारते समय गिर गए थे। उनके बाएं घुटने में चोट आई थी और उन्हें कई दिनों तक दर्द था लेकिन जब दर्द असहनीय हो गया तो वो इलाज के लिए लोक नायक अस्पताल पहुंचे जहां विशेषज्ञों ने उन्हें "तत्काल सर्जरी" की सलाह दी लेकिन इसके पहले उन्हें घुटने का MRI Test कराने को कहा, जो कि आम तौर पर काफी महंगा है लेकिन अस्पताल की ओर से उन्हें MRI Test की तारीख 15 जुलाई 2024 दी गई।

महबूब ने जब ये कहा कि दो साल बाद MRI Test क्यों? तो अस्पतालवालों ने उससे कहा कि दिल्ली के मतदाता पहचान पत्र रखने वाले व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलता है जबकि अन्य राज्यों के लोगों को इंतजार करना पड़ता है, अगर आपको जल्दी टेस्ट चाहिए तो आप बाहर से करा लीजिए।
दिल्ली निवासियों के लिए निशुल्क टेस्ट
आपको बता दें कि इसी बात परेशान होकर गुलाम महबूब ने अस्पताल को कानूनी नोटिस भेजा है। गुलाम महबूब ने अदालत से टेस्ट के संबंध में अस्पताल को बगैर किसी भेदभाव के जांच करने का निर्देश देने की मांग की है।
दो से तीन साल के लिए टेस्ट का इंतजार होता है
तो वहीं लोक नायक अस्पताल ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने कहा कि 'भारी भीड़ के कारण अस्पताल में दो से तीन साल के लिए टेस्ट का इंतजार करना बिल्कुल सामान्य सी बात है। इस मामले में कोई भेदभाव नहीं है। लोक नायक के पास रोजाना हजारों मरीज आते हैं। टेस्ट के लिए औसत प्रतीक्षा समय दो से तीन साल है और कुछ मामलों में यह 5 वर्ष भी है। इसलिए आपातकालीन मामलों में, हम मरीजों को सलाह देते हैं कि यदि उनके पास इसे वहन करने का साधन है तो वे निजी तौर पर अपना परीक्षण करवा लें, लेकिन जानबूझकर गुलाम महबूब के साथ ऐसा कुछ नहीं किया गया है।'












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