Delhi Flood: क्या इस बार डूबेगी नहीं दिल्ली? बाढ़ से निपटने के लिए सरकार का ‘मास्टर प्लान' NGT के सामने
Delhi Flood: दिल्ली हर साल मानसून आते ही सांस रोक लेती है। जुलाई 2023 की बाढ़ की तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी इस बार सच में तैयार है। इसी सवाल का जवाब देते हुए दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को अपना विस्तृत एक्शन प्लान सौंप दिया है।
15 जून तक पूरी होगी डीसिल्टिंग (Desilting Plan)
सरकार ने बताया है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 77 नालों से 20 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गाद हटाई जा रही है और यह काम 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। यानी मानसून आने से पहले नालों की सफाई का लक्ष्य तय कर दिया गया है।

जुलाई 2023 की बाढ़ के बाद जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग ने संयुक्त बाढ़ प्रबंधन समिति बनाई थी। इस समिति की सिफारिशों पर अब कार्रवाई की रिपोर्ट NGT को दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद राजधानी के जलाशयों और यमुना में गिरने वाले सभी नालों का रखरखाव सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने अपने हाथ में ले लिया है।
यमुना की वहन क्षमता पर स्टडी (Yamuna Carrying Capacity Study)
सरकार ने बताया कि केंद्रीय जल आयोग ने HEC-RAS मॉडल की मदद से हथनीकुंड बैराज से लेकर दिल्ली-हरियाणा सीमा तक करीब 202 किलोमीटर हिस्से का अध्ययन किया। इस स्टडी में नदी की पानी ढोने की क्षमता का आकलन किया गया।
हालांकि हरियाणा सिंचाई विभाग से सीमित आंकड़े मिलने के कारण कुछ नतीजे असंगत पाए गए। इसलिए मॉडल को और सटीक बनाने के लिए हरियाणा को भेजा गया है। प्रारंभिक आकलन में अलग-अलग हिस्सों में वहन क्षमता 1,000 क्यूमेक्स से लेकर 30,000 क्यूमेक्स तक पाई गई। कुछ जगहों पर तटबंध बने हैं और भारी बाढ़ की स्थिति में नदी का अतिरिक्त पानी हरियाणा प्रशासन संभालता है।
लंबी अवधि की तैयारी और फ्लडप्लेन मैप (Floodplain Demarcation)
सरकार ने यह भी बताया कि यमुना के वैज्ञानिक आकलन के लिए पुणे स्थित केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र को हाइब्रिड मॉडल स्टडी सौंपी गई है। यह रिपोर्ट अगस्त तक आने की उम्मीद है।
NGT के निर्देश के अनुसार 100 साल में एक बार आने वाली उच्चतम बाढ़ स्तर के आधार पर 1 मीटर कंटूर मैप भी तैयार किया जा रहा है, ताकि फ्लडप्लेन की स्पष्ट सीमाएं तय की जा सकें। यह काम 31 अगस्त तक पूरा होने की संभावना है।
तटबंध मजबूत, मॉनिटरिंग हाईटेक (SCADA Monitoring System)
शॉर्ट टर्म उपायों के तहत राइट बैंक के ORB और नीली छतरी इलाके में ऊंचाई बढ़ाने का काम मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। हाथी घाट से ड्रेन 12 रेगुलेटर तक तटबंध का काम पूरा हो चुका है और वह संचालन में है।
सरकार ने यह भी कहा कि बैराज और नालों पर SCADA आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं या अपग्रेड किए जा रहे हैं। नदी और नालों के गेज को GTS बेंचमार्क से चिन्हित किया जा रहा है, ताकि जलस्तर की सटीक निगरानी हो सके।
एजेंसियों के बीच तालमेल के लिए नई कमेटी (Inter-Departmental Monitoring Committee)
अक्सर अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी बाढ़ प्रबंधन में बड़ी चुनौती बनती रही है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतर-विभागीय निगरानी समिति गठित की गई है।
सरकार ने बताया कि 14 नालों पर पहले से ही फ्लड कंट्रोल रेगुलेटर लगे हैं और बाकी नालों पर भी रेगुलेटर लगाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर सरकार का दावा है कि इस बार तैयारी पहले से ज्यादा वैज्ञानिक और समन्वित है। अब नजर 15 जून की डेडलाइन और मानसून की पहली तेज बारिश पर रहेगी। दिल्ली सच में तैयार है या नहीं, इसका असली इम्तिहान तब होगा।












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