जर्नलिस्ट सौम्या मर्डर केस: कोर्ट ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया, 26 अक्टूबर को सुनाई जाएगी सजा
टीवी जर्नलिस्ट सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस में साकेत कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। साकेत कोर्ट ने रवि कपूर, बलजीत सिंह मलिक, अमित शुक्ला, अजय कुमार को 302 और मकोका के तहत दोषी ठहराया है। आरोपी अजय सेठी को 311 और मकोका के तहत दोषी पाया गया।
26 अक्टूबर को सभी दोषियों की सजा पर बहस होगी। बता दें कि, 15 साल पहले 30 सितंबर, 2008 को सौम्या अपनी कार में मृत पाई गई थीं। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि रवि कपूर, अमित शुक्ला, अजय कुमार और बलजीत मलिक ने लूट के इरादे से सौम्या का कत्ल किया था।

30 सितंबर 2008 को सौम्या विश्वनाथन रात 3 बजे विडियोकॉन टावर में अपने ऑफिस से वसंत कुंज में अपने घर के लिए निकलीं थीं। कार सौम्या खुद चला रही थीं। वसंत विहार में धीमी गति से जा रही कार में अकेली लड़की जाती देख आऱोपियों ने लूटने की कोशिश की।
आरोपी रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय भैंगा ने अपनी कार से ओवरटेक कर सौम्या की कार को रोकने की कोशिश की। आरोपियों ने कई बार सौम्या को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। जिसके बाद उन्होंने फायर कर दी।
गोली सीधी सौम्या के सिर में जा लगी। जिसके बाद चारों आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस को सौम्या का शव दक्षिणी दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर उन्हीं की कार से मिला। पुलिस ने दावा किया था कि उनकी हत्या का मकसद लूटपाट था। हत्या के आरोप में पांच लोगों रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को गिरफ्तार किया गया, सभी आरोपी मार्च 2009 से हिरासत में हैं।
ऐसे हुआ था मर्डर का खुलासा:
पुलिस को आऱोपियों को पड़कने में 6 महीने लग गए। आरोपियों को पड़कने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। सौम्या के देर रात तक घर ना पहुंचने पर पिता उन्हें फोन लगा रहे थे। सौम्या का फोन पुलिस वाले ने उठाया। उनके पिता को एक्सीडेंट की जानकारी दी। दरअसल सौम्या को गोली लगने के बाद उनकी कार बेकाबू होकर डिवाइड से जा टकराई थी।
पहली नजर में पुलिस को यह एक्सिडेंट का केस लगा, लेकिन पोस्टमॉर्टम से खबर मिली कि सौम्या की मौत सिर में गोली लगने से हुई थी। इस बात की भी पुष्टि हुई कि सौम्या पर गोली नॉन स्टैंडर्ड फायर आर्म से चलाई गई थी। लेकिन कई महीने बीतने के बाद पुलिस आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही।
लेकिन 17 मार्च 2009 को वसंत विहार से कॉलसेंटर की इग्जेक्युटिव जिगिषा घोष का अपहरण होता है और उनकी भी हत्या कर दी जाती है। वह भी सौम्या की तरह रात में ऑफिस से अपने घर वापस आ रही थीं।
पुलिस ने जिगिषा की हत्या को आऱोपी को जिगिषा का डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने के बा ट्रेस किया और उन्हें एक आरोपी बलजीत की तस्वीर महिपालपुर के एक एटीएम से मिली। उसकी शिनाख्त के बाद अन्य आरोपी पकड़े गए। पूछताछ के दौरान इन मुलजिमों से पुलिस को जानकारी मिली कि इन्होंने ही छह महीने पहले सौम्या का मर्डर किया था।












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