खौफनाक बदला: 14 साल के लड़के का यौन उत्पीड़न, 'मुखबिर' के शक में 24 बार चाकू घोंपा, कांवड़ शिविर से 3 अरेस्ट
Delhi Boy Assaulted Stabbed: दिल्ली में एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां 14 साल के एक लड़के को 'मुखबिर' होने के शक में क्रूरता की सारी हदें पार कर हत्या कर दी गई। 13 लोगों के एक गिरोह, जिसमें कई नाबालिग शामिल थे, ने न केवल लड़के की चाकू मारकर हत्या की, बल्कि उसके साथ यौन उत्पीड़न भी किया।
यह जघन्य अपराध 29-30 जून 2025 की रात को अंजाम दिया गया, और शव को दिल्ली की मुनक नहर में फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें से तीन को मेरठ के एक कांवड़ शिविर से गिरफ्तार किया गया।

खौफनाक अपराध की कहानी
1 जुलाई 2025 को समयपुर बादली पुलिस स्टेशन को दोपहर 3:10 बजे एक PCR कॉल मिली, जिसमें मुनक नहर में एक शव होने की सूचना थी। पुलिस उपायुक्त (बाहरी उत्तर) हरेश्वर स्वामी ने बताया, 'शव पूरी तरह नग्न था, गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था और शरीर पर चाकू के कई घाव थे।' पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस अपराध की भयावहता को उजागर किया-लड़के के शरीर पर 24 चाकू के घाव थे, जिनमें गुदा क्षेत्र में धारदार हथियार से हमले के निशान भी शामिल थे, जिससे यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय नवीन संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) और 238(बी) (साक्ष्य मिटाने या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देना) के तहत केस दर्ज किया। इसके अलावा, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) भी जोड़ी गई।
मुखबिर के शक में हत्या की साजिश
पुलिस जांच में पता चला कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड 19 साल का कृष्णा उर्फ भोला था, जो एक स्थानीय गिरोह का सरगना है। कृष्णा को शक था कि मृतक लड़का उसके प्रतिद्वंद्वी बधवार बंधुओं-मोनू और सोनू-का मुखबिर था। बधवार बंधु, जो वर्तमान में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत जेल में हैं, अवैध शराब व्यापार और डकैती जैसे अपराधों में शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, कृष्णा पिछले साल दिवाली के दौरान अपने ऊपर हुए हमले का बदला लेना चाहता था, जिसके पीछे उसे बधवार बंधुओं का हाथ होने का शक था। उसने मृतक को इसका जिम्मेदार ठहराया और अपने गिरोह के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
अपराध का क्रूर चेहरा
29-30 जून की रात को कृष्णा और उसके साथियों ने वीर चौक बाजार के पास पीड़ित को रोका। पहले उसकी पिटाई की गई, फिर उसे मोटरसाइकिल पर अपहरण कर मुनक नहर के पास सुनसान जगह ले जाया गया। वहां उसके कपड़े उतारे गए, चाकू से 24 बार हमला किया गया और उसके साथ सामूहिक यौन उत्पीड़न किया गया। इसके बाद शव को नहर में फेंक दिया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बारी-बारी से पीड़ित पर चाकू से वार किए। इस क्रूरता की वजह से पुलिस अब अधिकतम सजा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी टीम के साथ काम कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'चूंकि कई आरोपी नाबालिग हैं, हम कोर्ट से 16 साल से अधिक उम्र के आरोपियों को वयस्क मानने की अपील करेंगे।'
कांवड़ शिविर से गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें मुख्य आरोपी कृष्णा भी शामिल है। तीन अन्य फरार आरोपियों-मोनू और दो नाबालिगों-का पता हरिद्वार में उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों के जरिए लगा। ये तीनों मेरठ के एक कांवड़ शिविर में कांवड़ियों के वेश में छिपे थे।
18 जुलाई की रात को दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कांवड़ियों का वेश धारण किया और शिविर में घुसकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में इन तीनों ने अपराध कबूल किया और तीन अन्य आरोपियों-दीपक, चंदन और सचिन-के नाम उजागर किए। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।
बदले की आग और टूटते समाज का सच
यह हत्याकांड न केवल एक क्रूर अपराध है, बल्कि दिल्ली की गलियों में पनप रहे गिरोहों, बदले की भावना और किशोर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को भी उजागर करता है। एक 14 साल के मासूम को सिर्फ 'मुखबिर' होने के शक में इतनी बेरहमी से मार डालना समाज के लिए खतरे की घंटी है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए कमर कस चुकी है।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि आखिर युवा पीढ़ी को अपराध की इस दलदल में धकेलने वाली परिस्थितियां क्या हैं?
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