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Delhi Blast Update: अल-फला यूनिवर्सिटी पर ED की तड़के 5 बजे छापेमारी, NIA की जांच में अब तक क्या पता चला?

Delhi Blast Update: दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट मामले ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट पर ला दिया है। इस हमले को अब तक का सबसे संगठित "व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल" बताया जा रहा है, जो दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में फैला हुआ था।

इसी सिलसिले में मंगलवार, 18 नवंबर की सुबह 5 बजे से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फला यूनिवर्सिटी से जुड़े ट्रस्टी, सहयोगी और संस्थाओं पर 25 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।

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यह कार्रवाई दिल्ली, फरीदाबाद और अन्य इलाकों में जारी है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोग संदिग्धों को लॉजिस्टिक व तकनीकी सहयोग देने में भूमिका निभाते थे।

NIA ने पकड़ा मॉड्यूल का 'टेक्निकल मास्टरमाइंड'

इस बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 17 नवंबर को एक और अहम गिरफ्तारी की। 20 वर्षीय जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश, निवासी काजीकुंड (अनंतनाग, दक्षिण कश्मीर), को गिरफ्तार किया गया। वानी को "मॉड्यूल का तकनीकी एक्सपर्ट" बताया जा रहा है, जो ड्रोन मॉडिफिकेशन और रॉकेट जैसे हथियार तैयार करने की तकनीक पर काम कर रहा था।

NIA के अनुसार, वानी ने आत्मघाती हमलावर उमर-उन-नबी के साथ मिलकर कई हथियार संबंधी प्रयोग किए। वह आईईडी बनाने, ड्रोन मॉडिफाई करने और हमले की क्षमता बढ़ाने के काम में शामिल था। वानी को J&K पुलिस ने पहले हिरासत में लिया था, फिर उसे NIA ने अपने कब्जे में लिया।

उमर ने वानी को आत्मघाती हमलावर बनने के लिए 'ब्रेनवॉश' किया था। जांच में सामने आया है कि उमर और वानी पिछले एक साल से भारत के अलग-अलग हिस्सों में आत्मघाती हमले (Suicide Bombings) की योजना बना रहे थे। लेकिन वानी पीछे हट गया क्योंकि उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उसने कहा कि आत्महत्या उसके धर्म में वर्जित है। हालांकि, इसके बावजूद, वह तकनीकी रूप से मॉड्यूल को मजबूत करता रहा।

NIA की पूछताछ के बीच रविवार को वानी के पिता बिलाल अहमद ने आत्मदाह करने की कोशिश की और गंभीर जलने से उनकी मौत हो गई। परिवार लगातार NIA और पुलिस से अपने बेटों से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हुआ। यह घटना अब स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर चुकी है।

अल-फला यूनिवर्सिटी में बन रहे थे विस्फोटक?

दिल्ली पुलिस और NIA के अधिकारियों के अनुसार, वानी, उमर और कई संदिग्ध फरीदाबाद में अल-फला यूनिवर्सिटी के पास एक किराए के कमरे में रहते थे। वहीं पर IED के कुछ हिस्से और हथियार असेंबल किए गए। मॉड्यूल के सदस्य मस्जिदों में मिलकर योजनाओं को अंतिम रूप देते थे। सिग्नल ऐप पर एनक्रिप्टेड ग्रुप, डॉक्टरों की बड़ी भूमिका रही।

NIA की जांच में एक एन्क्रिप्टेड सिग्नल ग्रुप सामने आया है जिसे उमर ने 3 महीने पहले बनाया था। इसमें डॉ. मोजम्मिल शकील गनई, डॉ. अदील अहमद राथर, मुफ़स्सर राथर,मौलवी इरफान ये सभी मॉड्यूल का "कोर टीम" थे।

जांच में खुलासा हुआ कि फाइनेंशियल सपोर्ट तीन डॉक्टरों-मोजम्मिल, शाहीन शाहिद और अदील-की जिम्मेदारी थी। मॉड्यूल के हथियार 2023 और 2024 में कई बार एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचाए गए ताकि सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

अमीर राशिद की गिरफ्तारी से मिली बड़ी कड़ी

16 नवंबर को NIA ने कश्मीरी प्लंबर अमीर राशिद अली को गिरफ्तार किया था। उसके पास वही वाहन था जिसे उमर आत्मघाती हमले के लिए चला रहा था। अमीर, उमर और अन्य सदस्य कई बार फरीदाबाद, दिल्ली, कश्मीर की यात्राएं कर चुके थे। इस मामले में NIA ने अब तक 73 गवाहों से पूछताछ की है। जांच एजेंसियां अब मॉड्यूल के विदेशी हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क उनके संभावित टारगेट और जुड़े हुए राज्यों के नेटवर्क का पता लगा रही हैं।

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