Delhi Chunav 2025: दिल्ली में AAP क्यों काट रही है सीटिंग MLA का टिकट? जीती हुई सभी सीटों पर नया चेहरा
Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) अबतक 31 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है, इनमें से जीती हुई सभी 23 सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार बदल दिए हैं। बाकी 8 सीटें बीजेपी को मिली थीं, जिसके लिए भी 'आप' ने नाम घोषित किए हैं। इसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी की दिग्गज नेता राखी बिड़ला का नाम भी शामिल है, जो इस बार नई सीटों से चुनावी किस्मत आजमाएंगे।
'आप' ने पिछले 21 नवंबर को 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इनमें से हारी हुई 6 सीटें भी शामिल थीं। पार्टी ने तब इनमें से जीती हुई पांच सीटों में से तीन पर उम्मीदवार बदल दिए थे। इसी तरह से पार्टी ने सोमवार को 20 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें से 18 सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाया गया है, जिनमें से सिसोदिया और राखी बिड़ला की सीटें भी शामिल हैं, जो नए विधानसभा क्षेत्रों से मैदान में उतरने वाले हैं। बाकी दो सीटें वो हैं, जहां बीजेपी चुनाव जीती थी।

'आप' ने जीती हुई सभी 23 सीटों पर नए उम्मीदवार दिए
पहली लिस्ट में 'आप' ने किरारी एमएलए रितू राज गोविंद की जगह अनिल झा, सीलमपुर एमएलए अब्दुल रहमान की जगह चौधरी जुबैर अहमद और मटियाला एमएलए गुलाब सिंह के बदले सुमेश शौकीन को मौका दिया है। इसकी जीती हुई पांच सीटों में से दो विधायक पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।
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मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला ने अपनी सीटें छोड़ीं
सोमवार की लिस्ट सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक मनीष सिसोदिया अब अपनी तीन बार की अपनी सीट पटपड़गंज छोड़कर जंगपुरा से भाग्य आजमाएंगे। वहीं पटपड़गंज से उनकी जगह हाल ही में पार्टी में शामिल हुए स्टडी सेंटर के कोच अवध ओझा चुनाव लड़ेंगे। इसी तरह से पार्टी की एक और दिग्गज राखी बिड़ला इस बार मंगोलपुरी (सु.) की जगह मादीपुर (सु.) से भाग्य आजमाएंगी।
दूसरी लिस्ट में इस तरह से कट गया 16 सीटिंग MLA का पत्ता
मंगोलपुरी (सु.) से इस बार राकेश जाटव धर्मरक्षक को मौका दिया गया है। इसी तरह नरेला में शरद कुमार की जगह दिनेश भारद्वाज, चांदनी चौक से प्रह्लाद सिंह साहनी की जगह पुनरदीप सिंह साहनी, पटेलनगर से राजकुमार आनंद की जगह परवेश रतन,आदर्श नगर से पवन शर्मा की जगह मुकेश गोयल चुनाव लड़ेंगे।
तिमारपुर से पार्टी के एक और दिग्गज दिलीप पांडे की जगह सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू, जनकपुरी से राजेश ऋषि की जगह प्रवीण कुमार, पालम से भावना गौर की जगह जोगिंदर सोलंकी, बिजवासन से भूपिंदर सिंह जून की जगह सुरेंद्र भारद्वाज, मुंडका से धर्मपाल लकरा की जगह जसभीर कारला, देवली (सु) से प्रकाश जरवाल की जगह प्रेम कुमार चौहान, मुस्तफाबाद से हाजी यूनुस की जगह आदिल अहमद खान को टिकट दिया गया है।
वहीं, कृष्णानगर से एसके बग्गा की जगह विकास बग्गा, शाहदरा से पार्टी के दिग्गज विधायक और विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल की जगह जितेंद्र सिंह शंटी, त्रिलोकपुरी से रोहित कुमार की जगह अंजना पारछा को टिकट दिया गया है। जंगपुरा से पिछली बार प्रवीण कुमार चुनाव जीते थे, लेकिन सिसोदिया के आने से उनका रास्ता भी बंद हो गया है।
इन वजहों से 'आप' को बदलना पड़ रहा उम्मीदवार!
दरअसल, आम आदमी पार्टी दिल्ली में लगातार पिछले करीब 10 वर्षों से सत्ता में है। इस बार के चुनाव में उसे एक दशक की एंटी-इंकंबेंसी, वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी से छवि पर पड़े असर और भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों का सामना करते हुए चुनाव में उतरना है।
यही वजह है कि पार्टी विधानसभा सीटों पर मौजूद एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर और अन्य वजहों से या तो मौजूदा विधायकों का टिकट काट रही है या फिर दिग्गजों को दूसरी सीटें देकर एक विकल्प देने की कोशिशों में जुटी हुई है।
कुछ दिग्गजों ने पहले ही मैदान से हटने के दिए थे संकेत
इंडियन एक्सप्रेस ने पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रत्याशियों के बदलाव के पीछे सर्वे के परिणाम हैं, जिसको लेकर काफी मंथन हुआ है। शायद इसी कड़ी में दिलीप पांडे और राम निवास गोयल जैसे दिग्गजों ने पहले ही कहना शुरू कर दिया था कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसमें गुजरात में चुनाव अभियान का जिम्मा संभाल चुके विधायक गुलाब सिंह का भी नाम शामिल है।
विधायकों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी टिकट कटने का बहुत बड़ा कारण!
'आप' के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक,'कुछ मामलों में भले ही हमारे सर्वे और ग्राउंड रिपोर्ट यह दिखा रहे हों कि एमएलए की लोकप्रियता खत्म होने के बावजूद पार्टी आगे है,हम प्रत्याशी बदल देंगे, क्योंकि हम अंतिम समय में किसी भी निगेटिव वोटिंग से बचना चाहते हैं।'
सिसोदिया पिछली बार बहुत कम वोटों से जीते थे
मसलन, पटपड़गंज में मनीष सिसोदिया 2013 से लगातार जीत रहे थे। 2015 में उनकी जीत का अंतर करीब 28,000 वोटों का था, लेकिन 2020 में यह मार्जिन घटकर मात्र 3,100 से कुछ ज्यादा वोटों का रह गया था।
2020 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 15 नए चेहरों पर दांव लगाया था। लेकिन, इस बार पार्टी के लिए चुनाव ज्यादा चुनौतीपूर्ण लग रहा है। पार्टी नेता ने कहा,'यह चुनाव अलग है...हम तीसरा कार्यकाल मांग रहे हैं और एमएलए की लोकप्रियता मुख्य फैक्टर बन चुकी है।'
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आम आदमी पार्टी के नेता ने बताया,'जिस इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं, पार्षदों और विधायकों के बीच ज्यादा दिक्कतें हैं, हम पहले ही नाम घोषित कर देंगे, ताकि कैडर को फिर से प्रोत्साहित किया जा सके। अन्य इलाकों में नामों के एलान में देरी हो सकती है।'












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