'लाश न करवट लेती है और न परेशान करती है, इसलिए चिपककर सो जाती हूं'
अंशु ने शो के दौरान बताया कि हाफिज की 5 साल की बेटी ने उन्हें बताया कि जब उसे ठंड लगती है तो ठंड से बचने के लिए लाश से लिपट कर सोती थी।
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली ऊपर से जितनी चकाचौंध और आधुनिक दिखती है उसकी एक सच्चाई ऐसी भी है जिसे कोई देखना नहीं चाहता है। लेकिन इसकी एक कड़वी सच्चाई 15 सितंबर को पूरे देश के सामने आ गई। सोनी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में शामिल होने आए गूंज फाउंडेशन के संस्थापक अंशु गुप्ता ने दिल्ली की एक ऐसी तस्वीर सामने रख दी, जिसे देखकर न केवल शो के होस्ट दंग रह गए बल्कि वहां मौजूद दर्शकों के साथ-साथ टीवी देख रहे करोड़ों लोगों के आंखों से आंसू बहने लगे।

दिल्ली की रुला देने वाली सच्चाई
अंशु ने इस शो के दौरान बताया कि कैसे एक स्टोरी के सिलसिले में जब वो पुरानी दिल्ली की सड़कों पर घूम रहे थे तो उनकी मुलाकात लावारिस लाश उठाने वाले हबीब से हुई। हाफिज दिल्ली की सड़कों पर लावारिस लाश उठाने के काम करता था। इसी से उसका गुजारा चलता था।

लाश उठाने के बदले मिलते थे 20 रुपए
हबीब ने अंशु को बताया कि लावारिस लाशों को उठाने के लिए उन्हें प्रति शव 20 रुपए और 2 मीटर कफन का कपड़ा मिलता था। इसी 20 रुपए से उसका गुजारा होता था। हबीब ने उन्हें बताया था कि सर्दियों में उनका काम इतना बढ़ जाता था कि संभाले नहीं संभलता था। सर्दी की वजह से हर साल दिल्ली में दर्जनों लोगों की मौत हो जाती है।

लाश के साथ सोने के मजबूर बच्ची
अंशु ने शो के दौरान बताया कि हबीब की 5 साल की बेटी ने उन्हें बताया कि जब उसे ठंड लगती है तो ठंड से बचने के लिए लाश से लिपट कर सोती थी। अंशु ने जब इसकी वजह पूछी तो बच्ची ने बताया कि लाश न करवट देती है और न ही परेशान करती है। इसलिए ठंड से बचने के लिए वह लाश से लिपट कर सो जाती है।

गूंज की हुई शुरुआत
यह सुनकर अंशु गुप्ता हैरान रह गए और इसी घटना ने उन्हें झंगझोर कर रख दिया। इसी की वजह से उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने की सोची और गूंज नाम की संस्था बनाई जो इस तरह के लोगों की मदद करती है। यह संस्था 22 राज्यों में सहायता प्रदान कर रही है।












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