CSPOC 2026: भारतीय संसद क्यों बनी दुनिया के लिए मॉडल? PM Modi ने बताया लोकतंत्र का असली ताकत
PM Modi On CSPOC 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) को संबोधित करते हुए भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, विविधता और विकास यात्रा पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह चौथी बार है जब CSPOC का आयोजन भारत में हो रहा है, जो भारत की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद की साख को दर्शाता है।
इस दौरान पीएम मोदी ने विश्व भर में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मजबूत संसद और डेमोक्रेसी स्ट्रैटजिक चर्चा को लेकर विस्तार से चर्चा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत की संसद दुनिया के लिए लोकतंत्र का मॉडल क्यों है।

CSPOC 2026 समिट की थीम क्यों है अहम?
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस साल सम्मेलन की थीम है -Effective Delivery of Parliamentary Democracyयानी संसदीय लोकतंत्र को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना। आज दुनिया के कई देशों में लोकतंत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में यह जरूरी है कि संसदें सिर्फ कानून बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव भी लाएं। ऐसे समय में यह विषय संसदों की भूमिका, जवाबदेही और जनहित में निर्णय प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।
आजादी के समय भारत के लोकतंत्र पर उठे थे सवाल
पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तब दुनिया को शक था कि इतनी बड़ी आबादी और इतनी विविधता वाला देश लोकतंत्र को संभाल पाएगा या नहीं। लोगों को लगता था कि अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं लोकतंत्र को कमजोर कर देंगी। लेकिन भारत ने इन सभी आशंकाओं को गलत साबित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी विविधता को कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक और डर यह था कि लोकतंत्र के कारण भारत का विकास रुक जाएगा।लेकिन ऐसा नहीं हुआ।भारत ने लोकतांत्रिक तरीके से फैसले लेते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के साथ-साथ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है।
India Democracy Strength: संसद की असली जिम्मेदारी क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि संसद और विधानसभाएं केवल कानून बनाने की संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे जनता की आकांक्षाओं को नीति और कार्यक्रमों में बदलने का माध्यम हैं। संसदीय लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी प्रभावी तरीके से आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला पाता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही, संवाद और सहमति ये सभी संसदीय लोकतंत्र के मूल स्तंभ हैं। कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाएं और जनता का विश्वास बनाए रखें।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत न केवल अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी लोकतंत्र, शांति और सहयोग का मजबूत पक्षधर है। भारत का अनुभव अन्य देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की राह पर हैं। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी प्रतिनिधियों का भारत आगमन पर स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस सुझाव और समाधान लेकर आएगा।












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