भरता रहा खजाना, इलाज के लिए तड़पते रहे मरीज, CAG रिपोर्ट में AAP सरकार के चौंका देने वाले हुए खुलासे

Delhi CAG Report: दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार के मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता ने CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) रिपोर्ट पेश की। जिसमें पिछली आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी पोल खुल गई है। इस रिपोर्ट के जरिए रेखा गुप्‍ता सरकार ने अरविंद केजरीवाल सरकार में बीते 11 सालों में दिल्‍ली हेल्‍थ सर्विसेज को लेकर बरती गई लापरवाही को जनता के सामने उजागर कर दिया है।

कैग रिपोर्ट के अनुसार सरकारी खजाने में पैसा भरा होने के बावजूद अस्‍पतालों में लोग बड़ी बीमारियों के इलाज की बात तो दूर छोटी- छोटी जरूरतों के लिए तड़पते रहे। दिल्‍ली में पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार में मुफ्त की योजनाओं का ढिढोरा बस पीटती रही, पर्याप्‍त धन होने के बावजूद स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया, हेल्‍थ वर्कर्स की नियुक्ति तक नही की गई।

Delhi CAG Report

कोविड-19 के लिए फंड का अनावश्यक खर्च

कैग रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार से कोरोना महामारी के दौरान 787.91 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, बकाया राशि का प्रयोग ही नहीं किया गया। जिससे कोविड संकट के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी आई जिसका खामियाजा कई मरीजों को अपना जान गंवा कर भुगतना पड़ा। इतना ही नहीं इस दौरान आप सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं।

स्वास्थ्य कर्मचारियों की नहीं की गई भर्ती

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती और वेतन के लिए आवंटित 52 करोड़ रुपये में से 30.52 करोड़ रुपये का कोई उपयोग नहीं हुआ। स्‍वास्‍थकर्मियों की कमी के चलते अस्‍पतालों में मरीजों को इलाज के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

अस्पतालों में बेड और सुविधाओं की कमी?

दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन मात्र 1,357 बेड ही जोड़े गए। बेड ऑक्यूपेंसी का स्तर 101% से 189% तक देखा गया। जिसके कारण कुछ अस्‍पतालों में एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाया गया इतना ही नहीं फर्श पर मरीजों को लिटाया गया।

अस्‍पताल निर्माण प्रोजेक्‍ट में देरी

दिल्‍ली में तीन नए अस्पतालों के निर्माण परियोजनाओं में 5 से 6 साल की देरी हुई, जिससे निर्माण की लागत में काफी वृद्धि हुई। जैसे इंदिरा गांधी अस्पताल में 314.9 करोड़ रुपये की और बुराड़ी अस्पताल में 41.26 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

विधायक हरीश खुराना ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि पिछले 11 वर्षों में केवल तीन अस्पताल बनाए गए हैं या उनका विस्तार किया गया है, जबकि दूसरे अस्पतालों में निर्माण और उपलब्ध सुविधाओं में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी अस्पताल और बुराड़ी के अस्पताल में निर्माण में काफी देरी हुई है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी हुआ है।

बीजेपी विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने कैग रिपोर्ट कहा हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए फंड का सही प्रयोग नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि डीडीए द्वारा दिए गए स्थान का इस्तेमाल नहीं हुआ और खराब गुणवत्ता की दवाओं पर भी सवाल उठाए गए। उन्‍होंने खुलासा किया जिन दवा कंपनियों ब्लैक लिस्ट किया गया उनसे दिल्‍ली सरकर ने संपर्क रखा और लगातार अपने फायदे के लिए दवा पहुंचाने के लिए दवाएं लेते रहे।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का भी जिक्र किया, जैसे अस्पतालों में टीबी की दवाएं और रेबिज के इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। चाचा नेहरू अस्पताल की स्थिति को भी गंभीर है। स्वास्थ्य वर्षा की घोषणाएं केवल कागजों पर ही रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर सुविधाएं प्रदान नहीं की गई हैं।

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