Delhi: दिल्ली में AQI गंभीर स्तर पर, धुंध से 100 से अधिक उड़ानों में देरी, 3 फ्लाइट रद्द
Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट रविवार को लगातार पांचवें दिन गंभीर स्तर पर बना रहा। सुबह 7 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 428 के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। जिससे शहर में सामान्य जीवन और परिवहन प्रणाली प्रभावित हुई। प्रदूषण के गंभीर स्तरों ने दृश्यता में भारी कमी आई है। जिसका सबसे अधिक असर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखने को मिला है।
हवाई अड्डे पर परिचालन बाधित
फ्लाइट राडार की रिपोर्ट के अनुसार रविवार सुबह दृश्यता घटकर केवल 800 मीटर रह गई। इस वजह से 107 उड़ानों में देरी हुई और 3 उड़ानें रद्द करनी पड़ी। हवाई अड्डा अधिकारियों ने यात्रियों को अपडेट रखने और वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने की अपील की है।

प्रदूषण का खतरनाक स्तर
शहर के विभिन्न इलाकों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया। बवाना क्षेत्र 471 AQI के साथ सबसे प्रदूषित रहा। इसके बाद अशोक विहार और जहांगीरपुरी में AQI 466 और मुंडका व वजीरपुर में 463 के स्तर पर रहा। आनंद विहार, विवेक विहार और शादीपुर जैसे क्षेत्र भी गंभीर श्रेणी में शामिल रहे। जहां AQI 457 तक पहुंच गया।
दिल्ली के 35 निगरानी स्टेशनों में से 22 ने गंभीर और 7 ने गंभीर प्लस वायु गुणवत्ता दर्ज की। नोएडा और गुरुग्राम में AQI क्रमशः 308 और 307 दर्ज किया गया। जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। गाजियाबाद और फरीदाबाद में क्रमशः 372 और 260 AQI दर्ज किया गया। जो तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर ने दिल्लीवासियों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा दी हैं। सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों को बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
सरकार और प्रशासन की चुनौती
दिल्ली सरकार ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई आपातकालीन उपाय लागू किए हैं। जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक और वाहनों की आवाजाही सीमित करना शामिल है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भी दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के खतरनाक स्तरों को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है।
स्थायी समाधान की आवश्यकता
वायु प्रदूषण का यह संकट दिल्ली में पर्यावरणीय नीतियों और टिकाऊ समाधानों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है। विशेषज्ञों ने औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाने और परिवहन के कारण बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक उपायों पर बल दिया है।
दिल्ली की यह स्थिति न केवल पर्यावरण संकट की ओर इशारा करती है। बल्कि यह नागरिकों के स्वास्थ्य और उनके जीवन की गुणवत्ता के लिए गंभीर चुनौती भी बन गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन के प्रयास और प्रभावी कदम इस संकट को कम करने में कितने सफल होते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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