दिल्ली शराब नीति पर CAG रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, 2026 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान,AAP की बढ़ी टेंशन
Delhi News: दिल्ली शराब नीति पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार को झकझोर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति में कई गंभीर खामियां थीं, जिसके कारण सरकारी खजाने को 2026 करोड़ का नुकसान हुआ। खासकर दिल्ली विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस शराब नीति को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
भाजपा का दावा है कि यह रिपोर्ट CAG की है, जिसमें कहा गया है कि कुछ कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जो पहले से घाटे में चल रही थीं। कैग रिपोर्ट में शराब नीति में भारी खामियां और चूक का खुलासा किया गया है, जिसके कारण दिल्ली सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ।

कैग रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
1. 2,026 रूपए करोड़ का नुकसान: रिपोर्ट के अनुसार, नीति में खामियों के कारण सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
2. विशेषज्ञों की अनदेखी: शराब नीति बनाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह ली गई थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया।
3. बोलियों में गड़बड़ी : जिन कंपनियों को घाटे में चलने के बावजूद लाइसेंस दिए गए, उनकी वित्तीय स्थिति सही नहीं थी।
4. जरूरी मंजूरी नहीं ली गई: दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल से कई महत्वपूर्ण फैसलों की मंजूरी नहीं ली गई।
5. पारदर्शिता की कमी : शराब की कीमत तय करने और लाइसेंस जारी करने में पारदर्शिता की भारी कमी रही।
6. नीति का गलत तरीके से कार्यान्वयन: शराब की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब की सुविधाओं की कमी रही और खुदरा दुकानों का वितरण भी समान रूप से नहीं किया गया।
आर्थिक नुकसान के आंकड़े
- लाइसेंस वापस लेने के बाद उन्हें फिर से टेंडर नहीं करने से 890 करोड़ रूपए का नुकसान।
- ज़ोनल लाइसेंसधारकों को दी गई छूट से 941 करोड़ रूपए का नुकसान।
- कोविड-19 के कारण लाइसेंस शुल्क माफी से 144 करोड़ रूपए का नुकसान।
- सुरक्षा जमा राशि सही से वसूलने में गड़बड़ी से 27 करोड़ रूपए का नुकसान ।
शराब नीति की मुख्य खामियां
1. नीति का सही तरीके से लागू न होना।
2. लाइसेंस वितरण में गड़बड़ियां और अनुचित समझौते।
3. शराब की गुणवत्ता जांचने के लिए सुविधाओं का अभाव।
4. दुकानों का गलत तरीके से वितरण।
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BJP और AAP के बीच तकरार, संजय सिंह ने दिया जवाब
दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच दिल्ली शराब नीति को लेकर कथित घोटाले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे ने दिल्ली में चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है, और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। बीजेपी का आरोप है कि शराब नीति के चलते दिल्ली सरकार को 2,026 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ और कई AAP नेताओं ने रिश्वत ली।
वहीं, इस मसले पर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से नकारते हुए पलटवार किया। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बीजेपी के दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा, "यह CAG रिपोर्ट कहां है? ये दावे कहां से आ रहे हैं? क्या यह रिपोर्ट बीजेपी दफ्तर में दाखिल की गई है?" उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं, क्योंकि एक ओर वे दावा कर रहे हैं कि सीएजी रिपोर्ट अब तक पेश नहीं की गई है, दूसरी ओर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने क्या कहा?
बीजेपी ने जवाब देते हुए कहा कि रिपोर्ट को दिल्ली विधानसभा में पटल पर रखा जाना चाहिए। दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "शीश महल पर खर्च किया गया पैसा शराब नीति से आया था। उन्हें (AAP) विधानसभा सत्र बुलाना चाहिए और इसे सदन के पटल पर क्यों नहीं रख रहे हैं?"
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। 5 फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को चुनाव परिणाम घोषित होने हैं। इस रिपोर्ट ने आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए चुनावी माहौल को और भी गर्म कर दिया है।
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