'जो मैं बोलूं वही लिखो, वरना जेल', ED के छापे को लेकर AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने लगाए बड़े सनसनीखेज आरोप
ED raid in Saurabh Bharadwaj house: दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उनके आवास पर हुई छापेमारी के संबंध में एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ईडी अधिकारियों ने पूरे दिन उनका बयान दर्ज किया।
इस दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिन पर उन्होंने आपत्ति जताई है।भारद्वाज के अनुसार, ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव का परिणाम थी, जिसमें उनके परिवार पर भी मानसिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

"मैं बोलूं वही लिखो, वरना जेल"
सौरभ भारद्वाज ने बताया मंगलवार रात उनके घर पर ईडी की छापेमारी सुबह 7:15 बजे से शुरू होकर देर रात 2 बजे तक चली। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके बयान को बदलने के लिए लगातार दबाव डाला। उनके मुताबिक, "मुझे कहा गया कि जो मैं बोलूं वही लिखो, वरना जेल भेज दिया जाएगा।
मेरे बयान को सीनियर्स को शेयर कर रहे थे और...
भारद्वाज ने बताया, ईडी के सहायक निदेशक मयंक अरोड़ा ने उनके घर के वाई-फाई का इस्तेमाल कर उनके बयान को बार-बार सीनियर्स के पास व्हाट्सएप पर साझा किया और मार्क करके वापस आ रहा था।" जिसमें कहा गया कि उनके बयान के कुछ हिस्सों को हटाना होगा, जिस पर भारद्वाज ने आपत्ति व्यक्त की। उनकी आपत्ति के कारण, ईडी ने अंततः उनका बयान दर्ज नहीं किया।
हलफनामे को जब्ती मेमो से हटा दिया गया
सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की सूची में एक उच्च न्यायालय का हलफनामा (एफिडेविट) भी शामिल था। उन्होंने बताया कि आधी रात करीब 2 बजे फिर से एक पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें इस हलफनामे को जब्ती मेमो से हटा दिया गया।
मेरी बेटी के स्कूल जाने के समय ईडी मेरे घर पहुंची और...
भारद्वाज ने यह भी बताया कि सुबह उनकी बेटी के स्कूल जाने के समय ही ईडी और सीआरपीएफ के अधिकारी उनके घर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा, "मेरी छोटी बेटी नर्सरी में पढ़ती है, उसे स्कूल भेजकर घर को तलाशी के लिए खुला छोड़ दिया।" करीब 11:30 बजे ईडी अधिकारी मयंक अरोड़ा ने उनका बयान दर्ज करना शुरू किया।शाम 7:30 बजे एक अधिकारी ने उन्हें एक हलफनामा दिखाया, जिसे भारद्वाज ने सार्वजनिक दस्तावेज़ बताया।
"LG के दबाव में की गई ये कार्रवाई"
आप नेता ने दावा किया कि उनके पास एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों के उलट मीटिंग के मिनट्स और लिखित निर्देश मौजूद हैं। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की ओर से उन्हें फंसाने की कोशिश बताया।
भारद्वाज ने इस हलफनामे के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "क्योंकि यह हलफनामा साबित करता है कि मैंने अधिकारियों को बार-बार ऐसे अस्पताल बनाने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने उपराज्यपाल के कारण मेरे आदेशों का पालन नहीं किया।"
बीबी बोली- इन्हें ले जाओ, बेटी बोली- पापा के साथ मुझे भी ले जाएं
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारियों ने उनके परिवार को भी डराने की कोशिश की। उन्होंने मजाक करते हुए कहा अंदाज में बताया, "मेरी पत्नी बोली- ले जाओ इसे, ये वैसे भी घर पर नहीं रहता। बेटी ने भी कहा कि अगर पापा को ले जाएं तो मुझे भी साथ रख लेना, मैं स्कूल में फेमस हो जाऊंगी।"












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