सीएम का स्टिंग, उत्तराखंड बनता शराब का गटर
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग प्रकरण से साफ हो गया कि उत्तराखण्ड में सरकारें माफियाओं के हित में काम करती रही हैं। सरकार बनाने में बडा दखल रखते हैं उत्तराखण्ड में शराब माफिया।
22 जुलाई को संसद में भाजपा ने कांग्रेस पर जवाबी प्रहार करने के लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के सरकारी सचिव मोहम्मद शाहिद का एक शराब कारोबारी के साथ हो रहे सौंदे का वीडियो जारी करके सनसनी फैलाने का काम किया।
शराब का गटर
वरिष्ठ पत्रकार देव सिंह रावत कहते हैं कि उत्तराखण्ड की जनता जानती है कि देवभूमि उत्तराखण्ड जहां घी, दही व दूध सर्वत्र उपलब्ध था वहां राज्य गठन से पहले व बाद की तमाम सरकारों ने उस गंगा यमुना की पावन अवतरण भूमि उत्तराखण्ड को शराब का गटर बना कर बर्बाद कर दिया है।
भाजपा जहां शराब माफिया के हितों के पोषण करने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की तो मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस स्टिंग व भाजपा की मांग पर ही प्रश्न चिन्ह लगाते हुए इसे झूठ का पुलिंदा बताते हुए तमाम आरोपों को सिरे से नकारा।
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दिशाहीन बनाया
शराब ने न केवल उत्तराखण्ड के युवाओं को दिशाहीन बना दिया अपितु नौनिहालों के वर्तमान व भविष्य पर भी ग्रहण लगा दिया है। इससे सदियों से कर्मठ, वीर, ईमानदार व बुद्धिमान के विशिष्ट गुणों के लिए पूरे विश्व में विख्यात उत्तराखण्डी समाज पर भी ग्रहण लगा दिया है।
शराब पर पाबंदी
इसी कारण उत्तराखण्ड समाज में हिंसा, भ्रष्टाचार व कुशासन के शिकंजे में बुरी तरह से जकड़ गया है। प्रदेश की तमाम सरकारें उत्तराखण्ड के वर्तमान व भविष्य को बचाने के लिए उत्तराखण्ड में तत्काल शराब पर पूर्ण पाबंदी लगाने के बजाय गांव गांव, शहर-शहर शराब का राशन की दुकानों की तरह खोलने का काम कर रही है।
यह उत्तराखण्डी समाज का प्राचीन समय से एक गुण रहा कि यहां शराब, मांस व अपराध के व्यवसाय में लगे लोगों कभी भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता। इसलिए प्रदेश में अधिकांश शराब का कारोबार नेताओं व दलों की तिजोरियां भरने वाले कुख्यात लोगों की रही। ईमानदार, पाक साफ व्यक्ति बिना राजनैतिक संरक्षण के कभी इस पेशें में आता ही नहीं।
इसलिए यह साफ है उत्तराखण्ड में किसी भी दल की सरकार रहे वह दल अपने समर्थक रहे शराब कारोबारियों, खनन कारोबारियों, लकड़ी, जमीन, जल सहित तमाम लोगों के हितों के पोषण के लिए नीतियां बनाता है। हालत इतनी शर्मनाक हो गयी कि प्रदेश में शराब माफिया पर कई बार सरकार गिराने व बनाने का आरोप खुलेआम लगते रहे।
यही नहीं भाजपा व कांग्रेस के बडे नेताओं में भले ही इस सच्चाई को स्वीकार करने का साहस नहीं हो पर यहां की जनता जानती है कि उत्तराखण्ड में शराब के कुख्यात माफियाओं से चुनावी चंदा व उसके धन्धे में मलाई कौन कौन लेता है। शराब के कारोबारियों ने प्रदेश में जमीन से लेकर कई कारोबार फैला दिया है।













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