Chhattisgarh New CM: आदिवासी भी हो सकता है छत्तीसगढ़ का अगला सीएम, रेस में महिलाएं भी शामिल
Chhattisgarh CM: छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत से विधानसभा चुनाव जीत लिया है। इस बीच अगले मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व सीएम रमन सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, पूर्व आईएएस ओपी चौधरी के नाम की सर्वाधिक चर्चा हो रही है,लेकिन इस बात को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में अगला मुख्यमंत्री आदिवासी भी हो सकता है।

दरअसल आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में भाजपा को बड़ी जीत मिलने से यह साफ़ हो गया है कि विपक्ष के जातिगत जनगणना और आरक्षण के दांव के बाद भी यह वर्ग बीजेपी के साथ खड़ा हुआ है। भारतीय जनता आगे भी अपनी रणनीति बनाए रखने का प्रयास करेगी और यही वजह है कि इन वर्गों के प्रभावशाली चेहरों को अगुवाई दी जा सकती है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा को महिला और आदिवासी मतदाताओं ने बहुमत हासिल करने में काफी सहयोग प्रदान किया है। भाजपा भी सभी मंचों पर आदिवासियों, महिलाओं, पिछड़ों और युवाओं की भूमिका को मजबूत करने की बात करती रही है, ऐसे में छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के कुछ प्रमुख आदिवासी नेताओं को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल माना जा रहा है।
हालांकि मुख्यमंत्री पद की प्रथम दावेदारी रमन सिंह और अरुण साव की है, क्योंकि इन दो नेताओ की अगुवाई में ही राज्य में भाजपा ने चुनाव लड़ा है, किंतु आदिवासी नेताओ के नाम की चर्चा करें,तो इसमें प्रमुख नेताओं के तौर पर केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह, पूर्व मंत्री लता उसेंडी, पूर्व मंत्री केदार कश्यप और पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम केदार का नाम शामिल है। आदिवासी नेताओं की सूची में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और महेश गागड़ा का नाम भी आता है,पर उनकी संभावना नगण्य मानी जाती रही है।
इन सभी नेताओं में सबसे मजबूत दावेदारी रेणुका सिंह और लता उसेंडी की है,क्योंकि दोनों जनजाति समुदाय से होने के साथ ही महिला भी हैं,लिहाजा भाजपा इनमे से किसी को मौका देकर आदिवासियों और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की प्रयास को देशभर में भुना पायेगी। रेणुका सिंह ने आलाकमान के आदेश पर केंद्रीय मंत्री का पद छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ा है।वह केंद्र सरकार में आदिवासी मामलों के मंत्रालय का राज्यमंत्री हैं, जबकि लता उसेंडी को हाल ही भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पहले ही संकेत दिया जा चुका है कि छत्तीसगढ़ के लिए भाजपा संगठन में अब उनका कद रमन सिंह के बराबर ही है।
भाजपा संगठन के प्रदेश महामंत्री और पूर्व कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप और पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम का नाम भी राज्य में भाजपा के प्रमुख आदिवासी चेहरों में शुमार हैं। केदार कश्यप संगठन के लिए समर्पित नेता माने जाते हैं,जबकि रामविचार नेताम जब रमन सरकार में मंत्री थे,उस समय से आदिवासी मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग करते रहे हैं।
बहराहल मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह जीतकर आये विधायक और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व ही तय करेगा, लेकिन जिस तरह आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में बीजपी को जीत मिली है, तो इस बात की संभावना जरूर है कि कमान किसी आदिवासी समुदाय के नेता को दी जा सकती है।
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