NOTA की प्रासंगिकता पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़ के CM भूपेश बघेल ने कही यह बड़ी बात
CHHATTISGARH ELECTION NOTA: भारत में वाले चुनावों में मतदाता को नोटा का विकल्प चुनने का अधिकार हैं, लेकिन इस विकल्प की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि नोटा के विकल्प को खत्म किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने के बयान में कहा है कि जो मतदाता किसी भी उम्मीदवार को वोट देने के इच्छुक नहीं हैं, उनके लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में नोटा विकल्प को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। इससे चुनाव के नतीजे पर असर पड़ता है। रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान शनिवार को उन्होंने यह बात कही। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि चुनाव आयोग को नोटा के विकल्प पर पुर्नविचार करना चाहिए।
सीएम भूपेश बघेल ने दिया यह तर्क
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि ऐसा देखा गया है कि कभी-कभी नोटा में जीत और हार के अंतर से अधिक वोट पड़ जाते हैं। इससे चुनाव के परिणाम पर असर पड़ता है। ज्ञात हो कि 2018 के विधानसभा चुनाव में नोटा के वोटों की संख्या 2.82 लाख थी। सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि बहुत से लोग यह सोचकर नोटा बटन दबाते हैं कि उन्हें ऊपर या नीचे वाला बटन दबाना है, इस कारण नोटा को बंद किया जाना चाहिए।
भारत में कब आया नोटा?
ज्ञात हो कि भारत की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, 2013 में चुनाव आयोग ने वोटिंग पैनल पर अंतिम विकल्प के तौर पर ईवीएम में 'उपरोक्त में से कोई नहीं' या नोटा बटन जोड़ा था। नोटा के बटन पर काला क्रॉस बना होता है।
भारत में पहले नोटा की व्यवस्था नहीं थी। अगर किसी को लगता था कि उनके अनुसार कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है, तो वह लोग वोट नहीं डालने ही नहीं जाते थे। आगे चलकर नोटा का समर्थन में दायर हुई एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद साल 2013 में अदालत ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने का निर्णय किया था। तभी से ईवीएम में NOTA का विकल्प उपलब्ध हुआ और ऐसा करने वाला भारत विश्व का चौदहवां देश बन गया।












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