मां दंतेश्वरी के उपासक रघुनाथ ने बस्तर में ली समाधि, 4 फीट के गड्ढे में घुसकर 9 दिनों की साधना में बैठे जोगी
Jogi Bithai Ritual: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का महत्वपूर्ण विधान जोगी बिछाई की रस्म रविवार की देर शाम सिरहासार भवन में पूरी हुई। बीते 611 सालों से लगातार चली हा रही परंपरा के अनुसार बड़ेआमावाल गांव के रघुनाथ नाग इस साल चौथी बार जोगी बनकर साधना में बैठे हैं। साधना में बैठने से पहले उन्होंने विधि-विधान से मावली माता की पूजा की, जिसके बाद वे गाजे-बाजे के साथ सिरहासार भवन स्थित साधना स्थल पहुंचे।
बताया जाता है कि रघुनाथ अगले पूरे 9 दिनों तक 4 फीट गहरे गड्ढे में बैठकर साधना में लीन हो जाएंगे। ऐसा माना जाता है कि 9 दिनों की साधना के दौरान जोगी निराहार रहते हैं और क्षेत्र के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस दौरान बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारी व सदस्य भी मौजूद रहे।

पुरातन परंपरा के मुताबिक बस्तर ब्लॉक के ग्राम बड़ेआमावाल के जोगी परिवार के वंशज ही जोगी के रूप में पूरे 9 दिनों तक साधना में बैठते हैं। रविवार की शाम साधना में बैठने से पहले रघुनाथ को मांझी-चालकी व पुजारियों की मौजूदगी में नए कपड़े पहनाए गए।
इसके बाद गाजे-बाजे के साथ एक बड़े कपड़े का पर्दा बनाकर इसकी आड़ में उन्हें मावली माता मंदिर ले जाया गया। मंदिर में पूजा कर उन्होंने तलवार की पूजा की। इसके बाद वही तलवार लेकर सिरहासार भवन लौटे।
पुजारी की प्रार्थना के बाद जोगी 9 दिनों के लिए साधना में लीन हो गए। साधना काल में जोगी की सेवा के लिए बड़ेआमावाल के 20 से ज्यादा ग्रामीण यहां मौजूद हैं। ऐसी मान्यता है कि जोगी की साधना से देवी प्रसन्न होती हैं और निर्विघ्न रूप से बस्तर दशहरा मनाने का आशीर्वाद देती हैं।
जोगी बिठाई की रस्म को पूरा करने से पहले रघुनाथ ने शनिवार को परिवार के लोगों के साथ ही अपने पूर्वजों का तर्पण किया और फिर वे विधान में शामिल हुए। रघुनाथ बताते हैं कि हर साल उनके परिवार से ही सदस्य इस विधान को पूरा करते हैं। पिछले साल उनके चचेरे भाई दौलत नाग ने विधान को पूरा किया था।
बस्तर दशहरा के फूल रथ की परिक्रमा सोमवार से शुरू होगी। रथ परिक्रमा 21 अक्टूबर तक जारी रहेगी। फूल रथ को खींचने चोलनार के ग्रामीण पहुंच चुके हैं। इससे पहले रविवार की देर रात तक रथ कारीगर रथ को खड़ा करने जुटे रहे। उन्होंने बताया कि सोमवार की दोपहर तक रथ निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद शाम 6 बजे से मावली माता मंदिर से रथ परिक्रमा शुरू होगा। यहां से रथ सिरहासार चौक होते हुए गोल बाजार चौक से गुरूनानक चौक के रास्ते माईं दंतेश्वरी मंदिर पहुंचेगा।
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