Naxalite Attack: छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी कैसे? नक्सिलयों के मंसूबे फेल, टूटी कमर
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अक्तूबर के चार दिनों भीतर सुरक्षा बलों को दूसरी बड़ी सफलता मिली है। इसे इस साल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। अबूझमाड़ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 30 से अधिक नक्सली ढेर हुए हैं। मुठभेड़ जा रही है, ऐसे में मारे के नक्सिलियों को संख्या अपडेट हो रही है। इस बीच चर्चा सुरक्षाबलों को इस बड़ी सफलता की वजह की भी है। दावा किया जा रहा है कि बीते दिनों सिक्योरिटी फोर्सेज का खुफिया तंत्र मजबूत हुआ है, जिसके चलते अब जंगल क्षेत्र में दहशत फैलाने वाले संगठनों को लगातार सफाया किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की कमर तोड़ने की पूरी तैयारी है। राज्य में नक्सलियों को सपोर्ट करने वालों के खिलाफ भी सख्ती बरती जा रही है। शासना के आदेश के मुताबिक, नक्सलियों का सपोर्ट करने के मामले में दोषी पाए जाने वालों को सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। इस बीत उद्रवादियों को सफाए के लिए पुलिस ने कई इलाकों में अपना खुफिया तंत्र को भी मजबूती दी है।

बात अगर इस साल की करें तो बीते 9 महीनों के अंदर सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान 171 माओवादियों को मार गिराया। सुरक्षाबलों ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले 3-4 वर्षों के भीतर करीब 40 ऐसे बेस बनाए हैं और इस वित्तीय वर्ष तक करीब चार और तैयार कर रहा है, क्योंकि सबसे कठिन नक्सल विरोधी अभियान राज्य के दक्षिणी क्षेत्र बस्तर में केंद्रित है, जो ओडिशा और तेलंगाना की सीमा पर है।
नई ट्रिक का इस्तेमाल कर रहे नक्सली
छत्तीसगढ़ में नक्सली अब सुरक्षा बलों के शिविरों पर हमला के लिए दिवाली के पटाखे और अगरबत्ती का इस्तेमाल करने लगे हैं। कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उग्रवादी इसे अब नए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले महीने यानी 25 सितंबर को तेलंगाना के कोठागुडेम जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक शिविर में ऐसा ही नक्सली हमला हुआ था, जिसमें पुसुगुप्पा शिविर के आसपास अगरबत्ती का इस्तेमाल कर पटाखे फोड़ा गया। ऐसा करके कैंप के जवानों का ध्यान भटकाया और ठीक इसी वक्त रॉकेट और बंदूक से भी हमले किए गए।
टाइमर के रूप में अगरबत्ती
नक्सलियों की ओर से अगरबत्ती का इस्तेमाल "टाइमर" के रूप में किया जा रहा है, क्योंकि वे पटाखों के पास इन्हें जलाते हैं और जब तक पटाखे फूटते हैं, तब तक वे सुरक्षा शिविरों के पास सुरक्षित स्थिति में आ जाते हैं। ऐसा करके माओवादी इस कार्यप्रणाली के माध्यम से सैनिकों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य अंधेरे में विस्फोटों और बंदूक की गोलियों से उन्हें भ्रमित करना है। वे सैनिकों को शिविरों से बाहर निकालकर उनपर हमला करना चाहते हैं।
7 जिलों में 4 साल के अंदर 171 माओवादी मारे गए
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में व्यापक स्तर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने अभियान चलाया। जिसमें कुल 171 माओवादियों को मार गिया गया। दंतेवाड़ा, नारायणपुर समेत कुल सात नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
2026 तक तक नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का टारगेट
छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करने का टारगेट है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बयान में कहा है कि नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों को जल्द ही राहत मिलने वाली है। इसके लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को ठोस रणनीति बनाने को कहा गया है।
आतंकियों के छिपे होने सूचना पर एक्शन
नारायणपुर-दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर हुई मुठभेड़ में 30 नक्सली मारे गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया कि नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिलने पर नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले से सुरक्षाबल के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना किया गया था। सुरक्षाबल के दल में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और विशेष कार्य बल (STF) के जवान शामिल थे।
एक बयान में बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज ने कहा कि नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिलने पर नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले से सुरक्षाबल के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना किया गया था। खुफिया तंत्र में मिली सूचना पर सूझबूझ के साथ लिए एक्शन के दौरान जब माओवादियों की ओर फायरिंग होने लगी तो पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, इस दौरान गोली लगने से 30 माओवादी ढेर हो गए।












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