Chhattisgarh के इस जिले में स्थित है, सबसे प्राचीन गणेश मंदिर, जहां देश के हर कोने से पहुंचते हैं भक्त
छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के नवागढ़ में स्थित प्राचीन सिद्धि विनायक श्री शमी गणेश मंदिर भी इसी तरह के मान्यताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। ये एक दुर्लभ गणेश मंदिर है, जिसकी स्थापना 706 ईस्वी में राजाओं ने की थी
बेमेतरा, 31 अगस्त। देश भर में 11 दिनों तक चलने वाले गणेश चतुर्थी की शुरुआत होते ही गणेश मंदिरों और भव्य पंडालों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कई गणेश मंदिरों से जुड़ी खास मान्यताएं भी है। छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिले के नवागढ़ में स्थित प्राचीन सिद्धि विनायक श्री शमी गणेश मंदिर भी इसी तरह के मान्यताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। ये एक दुर्लभ गणेश मंदिर है, जिसकी स्थापना 706 ईस्वी में राजा महाराजाओं ने की थी । आइए जानते हैं इस प्रसिद्ध मंदिर का पुरातात्विक इतिहास क्या है?

प्राचीन शिलालेख मंदिर के ऐतिहासिक गवाह
वहीं मंदिर की स्थापत्य कला आकर्षक है। यह गणेश मंदिर देश का पहला अष्टकोणीय मंदिर है। यहां कुछ शिलालेख भी मौजूद हैं, लेकिन इस पर लिखी लिपि या भाषा का अब तक पता नहीं चल सका है। कई लोगों ने इसे पढ़ने की कोशिश की, मगर नहीं पढ़ सके। मंदिर परिसर में अष्टकोणीय कुआं भी है। 1880 में महाराष्ट्रीयन ब्राह्मणों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, और वहां से आए सैनिकों ने गणेश जी की पूजा शुरू की।

11 दिनों तक होती है विशेष पूजा अर्चना
गणेश चतुर्थी के शुरुआत होते ही श्री शमी गणेश मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है। यहां लोगों की मान्यता है कि सिद्धि विनायक श्री शमी गणेश मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस मंदिर के सामने जहां सामने पांडवों द्वारा पूजित शमी वृक्ष हैं। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना तंत्र सिद्धि द्वारा की गई थी । हर साल गणेश चतुर्थी मौके पर यहां भी 10 दिनों तक गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। नवागढ़ के इस चमत्कारी तीर्थ में कष्टों के निवारण व मंगलकामना के लिए देश के कोने-कोने से वर्षभर भक्त मनोकामना लेकर पहुंचते है।

704 ईस्वी में हुआ मंदिर निर्माण
इतिहासकार जेडी दीवान ने जानाकरी देते हुए बताया कि इस मंदिर का निर्माण 1,312 साल पहले तांत्रिक विद्या से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को संवत 646 में सन 704 को किया गया था। नवागढ़ रियासत के राजा नरबर साय ने श्री गणेश की मूर्ति स्थापित की थी। यह भी माना जाता है कि 1820 के पूर्व नवागढ़ करदाराज गौड़ सांमत की राजधानी थी और ईस्ट इंडिया के साथ संधि के बाद यह भोसला राजा के अधीन हो गया। इसके बाद बाद में गौड़ राजा ने लगान देने से मना कर दिया, जिसके कारण भारी युद्ध हुआ, जिसमें अंतिम गौड़ राजा महारसिया मारा गया। सैकड़ों साल पहले नवागढ़ कभी तंत्र क्रिया सिद्धि का केंद्र हुआ करता था। यहां के गणेश मंदिर में भारत के कोने-कोने से तांत्रिक आकर तंत्र विद्या सिखा करते थे।

देश के सिद्ध गणेश मंदिर की दुर्लभ मूर्तियों के होते हैं दर्शन
मंदिर के चारों ओर राज्य व देश के सिद्ध गणेश मंदिर की दुर्लभ मूर्तियों की प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं। यह एक ही जगह संपूर्ण तीर्थ का दर्शन कराती है। सभी ऐतिहासिक महत्व के हैं, जैसे सिद्धी टेक, जिला नागर महाराष्ट्र, गिरिजात्मज पुणे, चिंतामणी पुणे, महागणपति, वरद विनायक, मयूरेश्वर, बल्लालेश्वर, विघ्नेश्वर में स्थापित गणेश के दर्शन नवागढ़ के इस मंदिर में किए जा सकते हैं।

मंदिरों का नगर माना जाता है नवागढ़
मंदिर के आसपास खुदाई से कई बेशकीमती मूर्तियां भी मिली हैं, जो शासन-प्रशासन की उपेक्षा की शिकार हैं। पुरातात्विक महत्व की ये मूर्तियां बिना किसी सुरक्षा के ऐसे ही बिखरी पड़ी हैं। इसके साथ ही नवागढ़ मे हनुमान मंदिर, शारदा मंदिर, महामाया मंदिर, शनि मंदिर, और मिट्टी का किला भी है। मिट्टी का किला ढह चुका है। अब सिर्फ अवशेष ही नजर आते हैं। यहां पहले 120 तालाब हुआ करते थे, इनमें से आज सिर्फ 10 से 12 तालाब ही बचे हैं। बाकी तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। नवागढ़ के पूर्व मुखी गणेश मंदिर का इतिहास प्रसिद्ध है।












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