भाकपा व हमर राज दो आदिवासी पार्टियां भी मैदान में, बीजापुर सीट में बिगाड़ सकती हैं BJP कांग्रेस का खेल
CG Election 2023: बस्तर क्षेत्र के बीजापुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी और हमर राज पार्टी इस बार आपस में भिड़ सकती हैं। चूंकि भाजपा से इस सीट से पूर्व मंत्री महेश गागड़ा चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं कांग्रेस ने वर्तमान विधायक विक्रम मंडावी को ही अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा भाकपा से लक्ष्मीनारायण पोर्ते और हमर राज पार्टी ने अशोक तलांडी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इन हालातों में आदिवासी वोटों पर किसकी सेंध लगेगी, ये देखना दिलचस्प होगा।

मालूम हो कि कांग्रेस के प्रत्याशी और वर्तमान विधायक विक्रम मंडावी पर उनकी ही पार्टी के नेता अजय सिंह भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं बीते दिनों अजय को जिला बदर भी कर दिया गया है।
इन हालातों में जहां अजय की विधायक से खिलाफत का असर तो कांग्रेस पर पड़ेगा ही, साथ ही विधायक के भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर भाजपा भी जनता के बीच जा रही है। इसके चलते कुछ फायदा भाजपा को होता नजर आ रहा है।
इधर भाकपा के लक्ष्मीनारायण पोर्ते भी क्षेत्र के बड़े नामों में गिने जाते हैं, वहीं आदिवासी नेता अशोक तलांडी की पकड़ भी आदिवासियों में अच्छी है। इसके चलते इस बार बीजापुर विधानसभा में मामला त्रिकोणीय नहीं, बल्कि चौकोणीय दिख रहा है। हालांकि पोर्ते और तलांडी केवल वोट काटने का काम करेंगे और क्षेत्र में भाजपा या कांग्रेस का ही विधायक काबिज होगा, लेकिन कटने वाले वोटों से कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना है।
पिछले चुनावों पर नजर डालें तो भाजपा से महेश गागड़ा साल 2008 से चुनाव लड़ रहे हैं और इस बार वे तीसरी बार भाजपा की टिकट लेकर चुनावी मैदान में मौजूद हैं। जबकि कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे विक्रम मंडावी दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में विक्रम ने महेश को करीब 22 हजार वोटों से पछाड़ा था। ऐसे में भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर के आसार हैं।
इधर भाकपा व हमर राज पार्टी, दोनों ही दलों (भाजपा व कांग्रेस) का समीकरण बिगाड़ने को तैयार हैं। भाकपा की स्थिति क्षेत्र में सामान्य है, जबकि आदिवासी समाज की हमर राज पार्टी पर भी आदिवासियों के वोट खींचने का खासा प्रयास किया जा रहा है। इन हालातों में जहां भाकपा व हमर राज पार्टी को सम्मानजनक वोट मिलने के आसार हैं, वहीं क्षेत्र के राजनीति के जानकारों की मानें तो कटने वाले वोट कांग्रेस के बताए जा रहे हैं। यानि सीधे तौर पर ये कहा जा सकता है कि भाकपा व हमर राज पार्टी के प्रत्याशियों को मिलने वाले वोट उन मतदाताओं के होंगे, जो सीधे तौर पर कांग्रेस को बढ़त दिलवा सकते थे।
साल 2008 में पहली बार भाजपा के महेश गागड़ा ने कांग्रेस के राजेंद्र पामभोई को करीब 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। विधायक बनने के साथ ही उन्हें संसदीय सचिव के रूप में बड़ी जिम्मेदारी मिली। वहीं साल 2013 में भी भाजपा के महेश ने कांग्रेस के विक्रम (वर्तमान विधायक) को करीब 9 हजार वोटों से पछाड़ा था। इस बार उन्हें वन मंत्री बनाया गया।
इसके बाद साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव पिछले चुनाव में 9 हजार वोटों से हारने वाले विक्रम ने ही महेश को करीब 22 हजार वोटों से हराकर बीते तीनों चुनावों में कांग्रेस को मिली हार का बदला लिया था।
अब जबकि वोट शेयरिंग के समीकरण कुछ और ही बात कह रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस के साथ ही कुछ वोट भाजपा के भी कट सकते हैं। चूंकि दो और दलों ने अपनी एंट्री मार ली है, ऐसे में वोट शेयरिंग किस तरफ बढ़ेगा, इसे लेकर फिलहाल जानकार कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस को मजबूत स्थिति में होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप और अपने ही दल के नेता को इन्हीं आरोपों के चलते जिला बदर करवाने का भी असर बीजापुर में कांग्रेस पर पड़ सकता है।
बहरहाल इस बार भाजपा, कांग्रेस, भाकपा व हमर राज पार्टी के अलावा चुनावी मैदान में बहुजन समाज पार्टी से अजय कुड़ियम, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी से रामधर जुर्री, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अर्जुन गोटे और महिला प्रत्याशी ज्योति धुर्वा भी चुनावी मैदान में हैं।
संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़












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