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RBI Monetary Policy: क्या होती है मौद्रिक नीति, आसान भाषा में समझिए

RBI Monetary Policy: अक्सर आप मौद्रिक नीति शब्द को सुनते होंगे, लेकिन कई ऐसे लोग हैं जो इसका मतलब नहीं समझते हैं, आइए आसान भाषा में समझते हैं, क्या होती है मौद्रिक नीति

RBI Monetary Policy

RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए बाजार में पूंजी के प्रवाह को नियंत्रित करता है। इसके जरिए रिजर्व बैंक महंगाई को काबू में रखने की कोशिश करता है।

जब भी महंगाई बढ़ती है और चीजो के दाम बढ़ते हैं तो रिजर्व बैंक बाजार में पूंजी के प्रवाह को कम करता है ताकि चीजों के दाम नीचे आ सके। महंगाई दर को नियंत्रित रखना रिजर्व बैंक का एक अहम लक्ष्य होता है।

इसके साथ ही रिजर्व बैंक के सामने एक बड़ी चुनौती देश में विकास दर को आगे बढ़ाना होता है। इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा महंगाई दर को नियंत्रित करना होता है। इसी के संतुलन को स्थापित करने के लिए रिजर्व बैंक हर तीन महीने में अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करता है।

क्या होती है मौद्रिक नीति
देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए सरकार आर्थिक नीति का निर्धारत करती है। इसी का एक हिस्सा होती है मौद्रिक नीति। मौद्रिक नीति सरकार की आर्थिक नीति का ही एक हिस्सा है। इसके जरिए सरकार पूंजी की आपूर्ति को नियंत्रित करती है। बैंक किस दर पर लोगों को लोन देगा यह मौद्रिक नीति के तहत ही निर्धारित किया जाता है।

मौद्रिक नीति का लक्ष्य
भारत में मौद्रिक नीति देश में बैंकों की शीर्ष संस्था निर्धारित करती है। बैंकों की शीर्ष संस्था रिजर्व बैंक हैं, लिहाजा रिजर्व बैंक ही देश की मौद्रिक नीति का निर्धारण करती है और रिजर्व बैंक ही इसे लागू करती है। देश के पूरे बैंकिंग व्यवस्था को रिजर्व बैंक ही नियंत्रित करता है। रिजर्व बैंक की हमेशा कोशिश रहती है कि देश की अर्थव्यवस्था में ऐसा माहौल तैयार किया जाए ताकि लोगों की बचत और निवेश बढ़े। लोगों को बढ़ावा दिया जाए कि वह अपने पैसे को अधिक से अधिक सेव करें और इसे निवेश करें।

मौद्रिक नीति के उद्देश्य
मौद्रिक नीति का मुख्य उद्श्य देश की अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार पूंजी के प्रवाह को बाजार में बढ़ाना और घटाना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर देश की अर्थव्यवस्था में महंगाई है, चीजों के दाम बहुत ज्यादा हैं तो उस परिस्थिति में मौद्रिक नीति के तहत पूंजी के प्रवाह को कम किया जाएगा। वहीं अगर चीजों के दाम बहुत कम हो जाते हैं तो पूंजी के प्रवाह को बाजार में बढ़ाया जाता है। उत्पादों के दाम को स्थिर रखना भी रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का अहम उद्देश्य होता है। साथ ही मौद्रिक नीति में ही यह निर्धारित किया जाता है कि लोगों के हाथ में कितना पैसा देना है। लोगों को पैसा बैंक से लोन के जरिए हासिल होता है। ऐसे में किस ब्याज दर पर लोगों को लेन देना है, यह मौद्रिक नीति के जरिए ही निर्धारित किया जाता है।

मौद्रिक नीति देश की आर्थिक स्थिति पर निर्भर
मौद्रिक नीति का एक अहम उद्देश्य लोगों को अधिक से अधिक पैसों को बचाना और उसे निवेश करने के लिए बढ़ावा देना होता है। ऐसा करने से बैंकों के पास क्रेडिट बढ़ता है। जिसकी वजह से बैंक उन लोगों को लोन देता है जो बिजनेस करना चाहते हैं। नए बिजनेस शुरू होने से देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है और देश विकास की ओर बढ़ता है। लिहाजा रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति इस बात पर भी निर्भर करती है कि देश की आर्थिक स्थिति कैसी है।

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RBI कैसे नियंत्रित करता है पूंजी का प्रवाह
यहां समझने वाली बात है कि मौद्रिक नीति में निर्धारित लक्ष्य और उद्देश्य को हासिल करने के लिए रिजर्व बैंक के पास क्या उपकरण मौजूद हैं। कैसे रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था में पूंजी के प्रवाह को कम या ज्यादा करता है। रिजर्व बैंक के पास पूंजी प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कई अहम उपकरण होते हैं। जिसमे रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, कैश रिजर्व रेशियो, बैंक रेट, स्टेच्युअरी लिक्निडिटी रेशियो आते हैं।

कैश रिजर्व रेशियो (Cash Reserve Ration)
कॉमर्शियल बैंकों को अपनी कुल डिपॉजिट का एक हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा रखना होता, उसे कैश रिजर्व रेशियो कहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ऐसा ना हो कि बैंक के पास पूरा पैसा खत्म हो जाए। उदाहरण के तौर पर अगर बैंक में 100 रुपए जमा होते हैं तो इसमे से 4.5 रुपए बैंकों को सीआरआर के तौर पर रिजर्व बैंक के पास जमा रखना होता है।

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एसएलआर (Statutory Liquidity Ratio)
इसका मतलब होता कि बैंक के पास जितना भी कैश है उसका एक हिस्सा रिजर्व रखना होता। इसके लिए कॉमर्शियल बैंकों को सरकारी बॉन्ड, गोल्ड बॉन्ड आदि खरीदने होते हैं, इसपर बैंकों को ब्याज मिलता है। उदाहरण के तौर पर जब कोई आदमी 100 रुपए जमा करता है तो बैंकों को इसका 18 फीसदी एसएलआर के तौर पर रखना होता है। यानि 18 रुपए का बैंकों को बॉन्ड आदि खरीदना होता है।

रेपो रेट(Repo Rate)
कॉमर्शियल बैंको को रिजर्व बैंक जिस ब्याज दर पर लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। लेकिन अहम बात यह है कि इसके तहत कॉमर्शियल बैंको को रिजर्व बैंक को कोलैटरल देना होता है, यानि रिजर्व बैंक के पास कुछ बॉन्ड आदि गिरवी रखना होता है। मौजूदा समय में रेपो रेट 6.5 फीसदी है

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)

वहीं जिस ब्याज दर पर कॉमर्शियल बैंक अपना अतिरिक्त पैसा रिजर्व बैंक के पास जमा करते हैं, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। मौजूदा समय में रिवर्स रेपो रेट की दर 3.35 फीसदी है।

बैंक रेट (Bank Rate)
जब कॉमर्शियल बैंक रिजर्व बैंक से कोई लोन लेते हैं, इसपर कॉमर्शियल बैंकों को जो ब्याज देना होता है उसे बैंक रेट कहते हैं। लेकिन इसपर कॉमर्शियल बैंकों से रिजर्व बैंक कोई कोलैटरल नहीं लेता है। यानि रिजर्व बैंक इसके बदले बैंकों से कोई बॉन्ड आदि नहीं लेता है।

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