Apple tariff: भारत बना एप्पल का नया उत्पादन हब, टैरिफ से बचाव या लॉन्ग-टर्म प्लान? क्या है रणनीति?
Apple tariff news: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और ट्रम्प प्रशासन द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ नियमों ने वैश्विक कंपनियों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है। इन कंपनियों में एक प्रमुख नाम एप्पल का भी है, जिसने आगामी टैरिफ के प्रभाव से बचने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं।
5 अप्रैल से प्रभावी हुए 10% पारस्परिक टैरिफ के लागू होने से पहले ही एप्पल ने भारत और चीन जैसे अपने प्रमुख विनिर्माण केंद्रों से अमेरिका में उत्पादों की शिपमेंट तेज़ कर दी थी। आमतौर पर यह समय शिपमेंट के लिहाज से सुस्त माना जाता है, लेकिन टैरिफ के खतरे को भांपते हुए एप्पल ने इस बार विपरीत रुख अपनाया।

एक उद्योग सूत्र के अनुसार, "भारत, चीन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से फैक्ट्रियों ने आशंका के चलते अमेरिका को जल्द-से-जल्द माल भेजा। इससे कंपनी को अस्थायी रूप से बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है।"
Apple tariff: भंडारण रणनीति से मिली कीमतों को स्थिर रखने में राहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एप्पल की यह रणनीतिनए टैरिफ लागू होने से पहले पर्याप्त स्टॉक तैयार कर लेना है। कंपनी को फिलहाल खुदरा कीमतें बढ़ाए बिना अपने मौजूदा मूल्य मॉडल को बनाए रखने में मदद करेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुल्क पर प्राप्त किए गए स्टॉक से कंपनी को भविष्य में लगने वाले उच्च शुल्क से अस्थायी सुरक्षा मिलेगी। यह रणनीति उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना उच्च लागत का सामना करने में मदद कर सकती है। हालांकि, एक और चुनौती यह है कि अगर कंपनी को भविष्य में कीमतें बढ़ानी भी पड़ीं, तो यह बदलाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इसके असर से भारत समेत अन्य वैश्विक बाजार भी अछूते नहीं रहेंगे।
Apple tariff news: भारत बन रहा एप्पल हब, अमेरिकी बाजार में संभावनाएं
ट्रंप प्रशासन की ओर से 9 अप्रैल से लागू होने वाले एक और 26% पारस्परिक टैरिफ की घोषणा ने एप्पल की विनिर्माण रणनीति को और अधिक प्रभावित किया है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
वर्तमान में, भारत न केवल एप्पल के लिए आईफोन और एयरपॉड्स के उत्पादन का केंद्र बना हुआ है, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी उसका योगदान लगातार बढ़ रहा है। जहां चीन से आयातित उत्पादों पर अमेरिका 54% तक का टैरिफ लागू कर रहा है, वहीं भारत से आने वाले उत्पादों पर यह दर 26% है। यह 28% का अंतर एप्पल के लिए एक बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन पैदा करता है।
भारत पहले ही अमेरिका को लगभग 9 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन का निर्यात कर रहा है, जिनमें से बड़ी हिस्सेदारी एप्पल की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अब भारत से अधिक iPhones की खरीद करने पर विचार कर सकता है, ताकि ट्रम्प टैरिफ से उत्पन्न आर्थिक दबाव को कम किया जा सके।
हालांकि, एप्पल की दीर्घकालिक विनिर्माण रणनीति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आने वाले समय में अमेरिका विभिन्न देशों के साथ किस प्रकार की टैरिफ शर्तें तय करता है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि भारत की भूमिका केवल एक वैकल्पिक निर्माण स्थल की नहीं रही, बल्कि अब वह एप्पल की आपूर्ति श्रृंखला का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।












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