और सस्ता होगा पेट्रोल—डीजल, अमेरिकी बाजार में गिरे दाम
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के चलते जल्द ही ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
मंगलवार को अमेरिकी क्रूड बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गई। इस साल अप्रैल के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर के नीचे आ गई है।
एक दिन पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुए कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 42 डॉलर प्रति बैरल आंकी गई थी।
बाजार में भले ही कच्चे तेल की कीमत कम हुई है। पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन जारी है। विश्लेषकों का भी मानना है कि अगर ऐसे ही कच्चे तेल का उत्पादन जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में असर देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी बाजार के अंदर कीमतों में गिरावट के बाद वहां चलने वाली रिफाइनरी ने अपने नए क्रूड के आॅर्डर कम कर दिए हैं।

भारतीय बाजार में भी कच्चे तेल की कम होती कीमतों का असर दो दिन पहले ही देखने को मिला था। दो दिन पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की गई थी। पिछले दो सालों के भीतर में कच्चे तेल कीमतों आई भारी गिरावट से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था में भी काफी असर देखने को मिला है।
दो साल पहले जहां कच्चे तेल की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल थी वहीं आज वो कीमत घट 40 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे स्तर पर भी पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमत में आई भारी गिरावट के चलते ही सउदी अरब ने कच्चे तेल का उत्पादन घटाने की घोषणा की थी।
भारत कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातक देशों में से एक है। ईरान और सउदी अरब दोनों ही देशों से वो कच्चे तेल का आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में हुई गिरावटों का फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मिला और उसे अपना वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिली।












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