कैपिटल गेन्स टैक्स में सुधार पर अभी कोई प्रस्ताव नहीं: वित्त मंत्रालय
नई दिल्ली, 15 मार्च: वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार की पूंजीगत लाभ कर ढांचे में सुधार करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। अगले बजट के बारे में बात करना काफी समयपूर्व है। जबकि चालू वर्ष का वित्त विधेयक अभी भी चर्चा में है और अभी तक पारित नहीं हुआ है। सूत्रों ने मीडिया में चल रही उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि, सरकार अपनी कमाई बढ़ाने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स ढांचे में सुधार करना चाहती है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और मीडिया रिपोर्ट की अटकलें गलत हैं। देश में लिस्टेड इक्विटी पर एक साल से अधिक समय के लिए एक लाख रुपये की सीमा से ऊपर के लाभ पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का भुगतान करना होता है। एक साल से कम समय के लिए रखे गए शेयरों पर 15 फीसदी के हिसाब से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स का भुगतान करना होता है। यह प्रावधान एक अप्रैल, 2019 से लागू है।
कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था यह निर्धारित करने के लिए होल्डिंग अवधि निर्धारित करती है कि संपत्ति बेचते समय प्राप्त लाभ अल्पकालिक या दीर्घकालिक है या नहीं। सरकार का अनुमान है कि कई देशों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 25-30 फीसदी या स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।
पिछले महीने, राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा था कि सरकार मौजूदा पूंजीगत लाभ कर ढांचे की विस्तृत समीक्षा के लिए तैयार है, लेकिन उनका विचार है कि पूंजीगत लाभ प्रावधानों की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने उद्योग से दुनिया भर में पूंजीगत लाभ कर की मौजूदा दरों पर एक अध्ययन करने के लिए भी कहा है। उन्होंने कहा था कि सरकार शेयरों, ऋण और अचल संपत्ति पर कैपिटल गेन्स टैक्स की गणना के लिए विभिन्न दरों एवं होल्डिंग अवधि में बदलाव के लिए तैयार है। इसकी प्रमुख वजह प्रणाली को सरल बनाना है।












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