जेपी बिल्डर्स से घर खरीदने वालों को झटका, SC ने खरीददारों से पैसे वापस दिलवाने से पल्ला झाड़ा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से उन तमाम लोगों को बड़ा झटका लगा है,जिन्होंने जेपी इंफ्राटेक में खरीदा है। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी में घर खरीदने वालों के फंसे पैसों को उन्हें वापस दिलाने से अपना पल्ला झाड़ लिया है और मामला वापस NCLT के पास भेज दिया है। कोर्ट के फैसले से फ्लैट खरीदारों को फिलहाल उनका पैसा वापस नहीं मिलने की उम्मीद है। कोर्ट ने जेपी द्वारा जमा कराए 750 करोड़ रुपए भी एनसीएलटी को वापस भेज दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेआईएल, जयप्रकाश एसोसिएट लिमिटेड और उनके प्रमोटर्स जेआईएल के लिए बोली लगाने की नई प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। जेआईएल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए 750 करोड़ रुपए एनसीएलटी इलाहाबाद को हस्तांतरित किए जाएंगे।

जेपी के प्रमोटर्स नहीं लगा पाएंगे बोली
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जेपी के प्रमोटर्स जेपी इंफ्राटेक के लिए बोली नहीं लगा सकते, क्योंकि कंपनी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष दिवाला कार्यवाही का सामना कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी एसोसिएट की याचिका को खारिज करते हुए इस मामले को NCLT में जारी रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को 180 दिन के भीतर निपटाने को कहा है ।180 दिन की मोहलत के भीतर जेपी को अपना कर्ज लौटाने का रोडमैप देना होगा, यदि वो ऐसा करने में फेल होती है तो अगले 90 दिनों के भीतर जेपी इंफ्रा की पूरी संपत्ति बेचने और उसे दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
घर खरीददारों को लगा झटका
कोर्ट के इस फैसले से जेपी बिल्डर्स के फ्लैट खरीदारों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट के फैसले के बाद क्रेडिटर्स की नई समिति भी गठित की जाएगी। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की अगली सुनवाई अब एनसीएलटी में होगी। कोर्ट ने आरबीआई को जयप्रकाश एसोसिएट लिमिटेड के खिलाफ दिवालियापन कानून के तहत एक अलग से कार्रवाई शुरू करने का भी अनुमति दे दी है। वहीं कोर्ट ने जेपी में घर खरीदने वालों को वित्तीय ऋणदाताओं के समूह में शामिल करने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही कोर्ट ने जेपी इन्फ्राटेक के दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई थी। गौरतलब है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल एनसीएलटी ने आईडीबीआई बैंक की शिकायत पर कर्ज में डूबी जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दायर इंसॉल्वेंसी पेटीशन को स्वीकार किया था।












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