अब 100 फीसदी भारतीय नहीं रही हल्दीराम! इस विदेशी सरकारी कंपनी ने खरीदी इतनी प्रतिशत हिस्सेदारी
Haldiram: भुजिया खाने का मन होता है तो सबसे पहला नाम जुबां पर हल्दीराम (Haldiram) का ही आता है। इस दिग्गज कंपनी हल्दीराम की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई कंपनियां होड़ में थीं। लेकिन, सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक (TemaseK) ने बाजी मार ली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेमासेक ने हल्दीराम के स्नैक्स बिजनस में लगभग 10% हिस्सेदारी 1 अरब डॉलर में खरीद ली है। कई महीनों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है। इस सौदे से हल्दीराम (Haldiram) की कुल कीमत लगभग 10 अरब डॉलर आंकी गई है।

टेमासेक हल्दीराम को भारत के उपभोक्ता क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने वाली 'मूल्यवान संपत्ति' के रूप में देखता है। हालांकि, इससे पहले, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने हल्दीराम में निवेश करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें कंपनी के मूल्यांकन को लेकर चिंता थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बाबत हल्दीराम के सीईओ की तरफ से कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। हालांकि, टेमासेक ने बेन कैपिटल के साथ मिलकर हल्दीराम में हिस्सा खरीदने के लिए बोली लगाई थी। लेकिन बाद में बेन कैपिटल ने इससे किनारा कर लिया था। इसके बाद टेमासेक ने अकेले ही हल्दीराम की 10% हिस्सेदारी खरीद ली।
1937 में स्थापित हुई थी हल्दीराम
राजस्थान के बीकानेर में 1937 में स्थापित हल्दीराम भारत के स्नैक्स बाज़ार में एक प्रमुख नाम है। यूरोमॉनीटर इंटरनेशनल के अनुसार, भारत के 6.2 बिलियन डॉलर के स्नैक्स बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 13% है। इसका सबसे लोकप्रिय उत्पाद "भुजिया" है,जो छोटी दुकानों पर सिर्फ़ 10 रुपये में उपलब्ध है।
टेमासेक ने कहां-कहां किया है निवेश
टेमासेक ने पहले मणिपाल हॉस्पिटल्स और देवयानी इंटरनेशनल जैसी भारतीय कंपनियों में निवेश किया है, जो केएफसी और पिज्जा हट का संचालन करती हैं। हल्दीराम में हिस्सेदारी हासिल करके, टेमासेक अब भारत के पैकेज्ड स्नैक्स उद्योग के विकास पर दांव लगा रहा है।












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