जियो की मुफ्त सेवाओं ने सरकार को लगाया 685 करोड़ रुपए का चूना
टेलिकॉम कमीशन ने यह नोटिस किया है कि रिलायंस जियो की तरफ से प्रमोशनल ऑफर 90 दिनों के लिए जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने उसे उसके बाद भी जारी रखा।
नई दिल्ली। रिलायंस जियो की मुफ्त सेवाओं से जहां एक ओर ग्राहकों को खूब फायदा हो रहा है, वहीं सरकार को इससे करोड़ों का नुकसान हो रहा है। जियो की तरफ से आए दिन दी जा रही योजनाओं के चलते भारत सरकार को अब तक 685 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। टेलिकॉम कमीशन ने यह नोटिस किया है कि रिलायंस जियो की तरफ से प्रमोशनल ऑफर 90 दिनों के लिए जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने उसे उसके बाद भी जारी रखा। आपको बता दें कि सरकार हर मोबाइल ऑपरेटर से लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज लेती है, जो किसी भी टेलिकॉम कंपनी के रेवेन्यू के आधार पर तय होता है।

इसी के चलते टेलिकॉम कमीशन ने देखा है कि अभी तक स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज और लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को करीब 685 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। बुधवार को टेलिकॉम कमीशन ने माना है कि जियो के ऑफर की वह से इंडस्ट्री में टैरिफ पर दबाव बना है, जिससे सरकार की आमदनी कुछ कम हुई है। इसके मुताबिक रेवेन्यू में और 8-10 प्रतिशत की गिरावट आने के आसार दिख रहे हैं। टेलीकॉम कमीशन जून 2002 और सितंबर 2008 के फैसलों को भी लागू करना चाहता है। जून 2002 में टेलिकॉम कमीशन ने फैसला दिया था कि कोई भी टेलीकॉम कंपनी 90 दिन से अधिक कोई प्रमोशल ऑफर नहीं चला सकता है। इस आदेश का हवाला देकर एयरटेल रिलायंस जियो के खिलाफ शिकायत भी कर चुका है। ये भी पढ़ें- होली पर जाना है घर तो सिर्फ 777 रुपए में मिल रहा हवाई टिकट
इसके साथ ही साथ 14 पैसे का फ्लोर प्राइस भी तय किया गया था, जिससे कम पर कोई वॉइस कॉल ऑफर नहीं की जा सकती। टेलीकॉम कमीशन की तरफ से तैयार किए गए नोट में लिखा है कि जियो ने 5 सितंबर 2016 को सर्विस शुरू की थी और उसका पहला प्रमोशनल ऑफर 31 दिसंबर 2016 तक के लिए था, जो 90 दिनों से अधिक था। टेलिकॉम कंपनियों से सरकार को स्पैक्ट्रम का 1 लाख करोड़ रुपया वसूलना है।












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