RBI ने कैंसिल किया इस बड़े बैंक का लाइसेंस, कहीं आपका खाता भी तो इसमें नहीं

बैंक में करीब 8 हजार लोगों के खाते हैं। लाइसेंस निरस्त होने के बाद इस बैंक के करीब 8 हजार जमाकर्ताओं पर उनकी रकम फंसने का खतरा मंडरा रहा है।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) अधिक होने पर कार्रवाई करते हुए एनसीआर के एक बड़े बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। बैंक की चार शाखाएं गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और हापुड़ में संचालित थीं। इसके अलावा बैंक के दो एक्सटेंशन काउंटर भी चल रहे थे। बैंक में करीब 8 हजार लोगों के खाते हैं, जो अब अधर में लटक गए हैं।

खाताधारकों पर मंडराया पैसा फंसने का खतरा

खाताधारकों पर मंडराया पैसा फंसने का खतरा

आरबीआई ने बैंक विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए महामेधा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस निरस्त किया है। लाइसेंस निरस्त होने के बाद इस बैंक के करीब 8 हजार जमाकर्ताओं पर उनकी रकम फंसने का खतरा मंडरा रहा है। आरबीआई ने अपनी जांच में पाया कि गाजियाबाद से संचालित महामेधा बैंक की काफी रकम बड़े लोन के कारण एनपीए में बदल गई है। आरबीआई के मुताबिक बैंक की बड़ी रकम एनपीए में जाने के कारण खाताधारकों की जमापूंजी पर खतरा बढ़ गया था।

एसबीआई कर चुका है लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति

एसबीआई कर चुका है लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति

आरबीआई ने अपनी कार्रवाई में कहा कि महामेधा बैंक ने बैंकिंग नियमों का उल्लंघन किया है। इससे पहले पिछले साल अपना 75 लाख रुपए का ओवर ड्राफ्ट क्लीयर ना होने के कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भी आरबीआई से महामेधा बैंक का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति कर चुका है। एसबीआई ने महामेधा बैंक के साथ किसी भी तरह के लेन-देन पर रोक लगाई हुई थी।

मैनेजमेंट बोला, सुरक्षित है बैंक का पैसा

मैनेजमेंट बोला, सुरक्षित है बैंक का पैसा

उधर, इस मामले पर जब बैंक मैनेजमेंट से बात की गई तो उन्होंने आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। हालांकि मैनेजमेंट ने इतना जरूर कहा कि बैंक का पैसा सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद अपील करने के लिए उनके पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं। अधिकारियों ने कहा कि बैंक में जिस-जिस के खाते हैं, सभी का पैसा सुरक्षित है।

जानिए क्या है एनपीए

जानिए क्या है एनपीए

आपको बता दें कि एनपीए बैंक की वो रकम है जो बैंकों द्वारा लोन के रूप में दी जाती है लेकिन इसके वापस आने की संभावना नहीं रहती। नियमों के हिसाब से जब किसी बैंक लोन की ईएमआई या ब्याज देय तारीख के 90 दिन के भीतर नहीं आती है तो उसे एनपीए में डाल दिया जाता है।

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