निवेश की बुनियादी बातें सीखने के लिए महंगे कोर्स की जरूरत नहीं है- संदीप जेठवानी
dezerv shares के को-फाउंडर संदीप जेठवानी ने वन इंडिया को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वैकल्पिक निवेश, निवेश से पहले उससे जुड़ी तमाम बुनियादी बातों को सीखने के महत्त्व के अलावा पोर्टफोलियो साइंस, मौजूदा दौर में क्लाइंट के पोर्टफोलियो तैयार करने के दौरान धैर्य के साथ काम करने से लेकर रियल एस्टेट में लंबी अवधि के रिटर्न के बारे में विस्तृत बातचीत की है। उन्होंने बताया है कि एक निवेशक को किससे सलाह लेनी चाहिए और निवेश से जुड़े जोखिमों को देखते हुए, किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए। यहां इस विस्तृत इंटरव्यू के खास अंश दिए जा रहे हैं।

सवाल: 25 साल के निवेशक को पहली बार कौन सी 3 चीजें पता होनी चाहिए, जिससे कि वह अपनी मासिक आमदनी का लगभग 15% विकल्प (Alternatives) के लिए रखने पर विचार करे?
संदीप जेठवानी: विकल्प में ऐसेट क्लास या इंस्ट्रूमेंट की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। जैसे वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी, प्री-आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) सिक्युरटीज, हेज फंड, कमोडिटी लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स, जैसे गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) या इन्फ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs),मार्केट लिंक्ड डिबेंचर (MLDs)। इनके अलावा क्रिप्टो करेंसी और एनएफटी, जो कि हाल ही में हुई नई खोज हैं।
वैकल्पिक निवेशों के दौरान इन बातों को दिमाग में रखना चाहिए :
- पहली चीज है कि एक समझ विकसित हो- लोगों को पता होना चाहिए कि ये पारंपरिक निवेशों से कैसे अलग हैं, विभिन्न बारीकियां, जैसे इंवेस्टमेंट हॉरिजन, लिक्विडिटी, रिटर्न की उम्मीदें, बुनियादी ऐसेट का व्यवहार आदि।
- दूसरी चीज है रिस्क मैनेजमेंट- यह अपेक्षाकृत सीमित नियमों और पुराने डेटा की सीमित उपलब्धता के चलते एक बिल्कुल ही नया क्षेत्र है। इसलिए इसमें तुलनात्मक रूप से जोखिम ज्यादा है, यह इलिक्विड है और इसी वजह से इसमें बहुत ज्यादा तत्परता की आवश्यकता है।
- आखिर में, पोस्ट-इंवेस्टमेंट मॉनिटरिंग- इस तरह के निवेशों के साथ बदलते बाजार की गतिशीलता, रेग्युलेटरी गाइडलाइंस के साथ-साथ, समय-समय पर रि-बैलेंसिंग और मॉनिटरिंग को समझने में सक्रिय रूप से शामिल होने की आवश्यकता है।
सबसे खास बात ये है कि बहुत ज्यादा जोखिम को देखते हुए इन ऐसेट को आपकी तरफ से विशेषज्ञता की जरूरत है। ऐसी विशेषज्ञता की तलाश अनिवार्य है।
सवाल: एक नए ग्रैजुएट को, जो निवेश करना सीखना चाहता है, आप किन दो बातों की सलाह देंगे?
संदीप जेठवानी: इसपर ध्यान केंद्रित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है प्रामाणिक और मूल संसाधनों से सीखना। बुनियादी चीजें अच्छे से सीखने के लिए किसी को महंगे कोर्स की जरूरत नहीं है। बुनियादी चीजों से शुरू करें, जैसे कि पावर ऑफ कंपाउंडिंग, डायवर्सिफिकेशन का महत्त्व, लंबे समय के लिए निवेश की अच्छी आदतों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक पूर्वाग्रहों का निर्माण करना, जो हमारी अधिकांश निवेश यात्रा में बाधा डालते हैं। 'dezerv'में हम अपने ब्लॉग आर्टिकल्स, न्यूजलेटर्स, एक्सप्लेनर सीरीज और इनसाइडर इन्वेस्टिंग पॉडकास्ट के माध्यम से लोगों को निवेश और पर्सनल फाइनेंस पर शिक्षित कर रहे हैं, जो हमारे यूट्यूब चैनल और वेबसाइट पर सभी के लिए मुफ्त में उपलब्ध हैं।
अगली चीज ये है कि धैर्य रखें और बाजार के रुझानों और व्यावसायिक बुनियादी बातों का विश्लेषण करने में समय दें। कृपया हर दूसरी हॉट चीज या फ्री स्टॉक टिप्स के शिकार न बनें - लंबी अवधि में अच्छा धन जुटाने के लिए, हमें उतार-चढ़ाव के बीच लगातार निवेश बरकार रखने की आवश्यकता है। वित्तीय सलाह लेते समय,अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट की बातों पर गौर करें और अपने बेहतरीन हितों को दिमाग में रखें। लंबे समय में सामान्य सुझाव कारगर साबित नहीं हो सकते- आपको अपनी वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एक निवेश रणनीति बनाने की जरूरत है। पर्सनल फाइनेंस किसी कारण से ही व्यक्तिगत है!
सवाल: आप म्यूचुअल फंड और ईटीएफ में अंतर कैसे करेंगे ? इन दो निवेश चैनलों के बीच आदर्श आवंटन के लिए विभाजन क्या होना चाहिए?
संदीप जेठवानी: म्यूचुअल फंड और ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) अलग-अलग ऐसेट क्लास में भिन्न तरीके से निवेश करने के तरीके हैं। म्युचुअल फंड में निवेशकों के एक ग्रुप से फंड इकट्ठा करना और फंड को स्टॉक, बॉन्ड और दूसरे ऐसेट क्लास में निवेश करना शामिल है, जो कि एक फंड मैनेजर सक्रिय रूप से मैनेज करता है, जो कि पोर्टफोलियो के आवंटन और समय-समय पर उसकी अपडेटिंग करता है। दूसरी तरफ, एक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सिक्युरिटीज का एक संग्रह है, जो आम तौर पर किसी खास इंडेक्स, सेक्टर, कमोडिटी या किसी अन्य ऐसेट को ट्रैक करता है। ईटीएफ से शेयरों की तरह सक्रिय रूप से कारोबार किया जा सकता है, क्योंकि वे सीधे एक्सचेंजों पर लिस्टेड होते हैं।
जब आदर्श आवंटन की बात आती है, तो यह बहुत ही ज्यादा व्यक्तिपरक हो जाता है। क्योंकि, यह आवश्यक लिक्विडिटी की मात्रा, खर्च, साथ ही रिटर्न की अपेक्षाओं जैसी चीजों पर निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड को फंड मैनेजर सक्रिय तौर पर मैनेज करता है, जिसका उद्देश्य इंडेक्स की तुलना में ज्यादा बेहतरीन प्रदर्शन करके देना है। जबकि, ईटीएफ आम तौर पर निष्क्रिय निवेश विकल्प होते हैं, जो इंडेक्स के परफॉर्मेंस को ट्रैक करते हैं। निजी निवेश के उद्देश्य और रिटर्न की उम्मीदों के मुताबिक आदर्श आवंटन पर फैसला लेने के लिए व्यक्ति इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट से सलाह ले सकता है।
सवाल: क्वानटिटेटिव बेस्ड निवेश कैसे काम करता है ? आप किस डेटा सेट को देखते हैं और फिर वे एकसाथ कैसे आते हैं ?
संदीप जेठवानी: क्वानटिटेटिव इंवेस्टमेंट एक निवेश दृष्टिकोण है, जो उन्नत गणितीय मॉडलिंग का इस्तेमाल करके पैटर्न और ट्रेंड को खोजने के लिए हिस्टोरिकल डेटा का विश्लेषण करता है; और फिर इन इंसाइट्स का उपयोग हमारे यूजर्स के लिए इंवेस्टमेंट व्हीकल और ऑप्टिमल ऐसेट आवंटन जैसे निवेश से संबंधित निर्णय लेने के लिए करता है। यह निवेश का एक ज्यादा वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीका है। क्योंकि, हम डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके असंख्य डेटा बिंदुओं का विश्लेषण कर सकते हैं, और यूजर्स के रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल के आधार पर निजी अनुशंसा तैयार कर सकते हैं।
'dezerv'में हम पोर्टफोलियो क्रिएट करने के लिए ब्लैक-लिटरमैन मॉडल जैसे मॉडर्न पोर्टफोलियो साइंस और क्वांटिटेटिव फ्रेमवर्क इस्तेमाल करते हैं। इस्तेमाल किए गए प्रमुख डेटासेट में एएमसी और फंड मैनेजर पेडिग्री, हिस्टोरिकल पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस, मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा, फंड एयूएम और खर्च, क्रेडिट क्वालिटी, वैल्यूएशन मीट्रिक आदि शामिल हैं। क्वांटिटेटिव एक्सपर्ट निवेश पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए इन डेटासेट का उपयोग करके एल्गोरिथम मॉडल चलाते हैं, जिन्हें हमारे यूजर्स को सिफारिश करने से पहले हमारे डोमेन विशेषज्ञों द्वारा अच्छी तरह से जांचा जाता है।
सवाल: टियर 2 और उसके भी आगे की जगहों के लोगों में जागरूकता लाने के लिए आप क्या कर रहे हैं ?
संदीप जेठवानी: जैसे भारत सरकार दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन के लिए जेएएम (जनधन, आधार, मोबाइल) ट्रिनिटी पर काम करती है और आरबीआई अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों पर भरोसा करता है, हम विभिन्न डिजिटल चैनलों जैसे- सोशल मीडिया, हमारी वेबसाइट के अलावा मीडिया सहयोग और अभियान चलाकर वित्तीय जागरूकता लाते हैं।
हम अपने यूट्यूब चैनल, वेबसाइट आर्टिकल, न्यूजलेटर्स के साथ-साथ विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों और मीडिया सहयोगों के जरिए पर्सनल फाइनेंस और इंवेस्टमेंट के बारे में टियर 2 और उसके आगे की जगहों के लोगों समेत तमाम भारतीयों को शिक्षित और सूचित करने का सिलसिला जारी रखेंगे।
सवाल: 30 साल से कम उम्र के लोगों को अचल संपत्ति को लेकर ऐसेट क्लास के रूप में सोचना कैसे शुरू करना चाहिए? वाणिज्यिक अचल संपत्ति में निवेश करने का तरीका क्या है, जिसपर अब वे विचार कर सकते हैं?
संदीप जेठवानी: ऐतिहासिक रूप से रियल एस्टेट में निवेश के लिए बहुत ज्यादा धन की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन, रियल एस्टेट में निवेश के लिए हाल में कुछ नए तरीके पेश किए गए हैं, जिनमें रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) शामिल हैं। वे एकदम से म्यूचुअल फंड की तरह हैं, जो लोगों से पैसा इकट्ठा करते हैं और उन्हें आरईआईटी के लिए होटल, दफ्तर/अपार्टमेंट बिल्डिंग, गोदामों आदि समेत वाणिज्यिक अचल संपत्ति जैसे ऐसेट में निवेश करते हैं और InvITs के लिए हाइवे, पावर प्लांट, सड़कों, पाइपलाइनों आदि की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करते हैं।
प्रॉपर्टी के मैनेजमेंट में आए दिन शामिल हुए बिना, किराये की आमदनी के साथ-साथ कैपिटल अप्रीशीऐशन का लाभ नियमित रिटर्न के रूप में मिलता है। यह पारंपरिक रियल एस्टेट निवेशों में देखी गई लिक्विडिटी और सूचना के अभाव की दो जन्मजात समस्याओं का समाधान करता है, साथ ही लंबी अवधि में एक स्थिर रिटर्न सुनिश्चित करता है। तो कमर्शियल रियल एस्टेट निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, जो विविधता प्रदान करने के साथ-साथ मुद्रास्फीति से भी बचाव कर सकता है। निवेश के उद्देश्यों और हॉरिजन को देखते हुए लोगों को प्रत्येक इंस्ट्रुमेंट के मद्देनजर सही आवंटन तय करने के लिए एक इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
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