क्या आज खुला है शेयर बाजार? जानिए क्या है मुहूर्त ट्रेडिंग का समय
Share Mrket: मुहूर्त ट्रेडिंग का एक घंटे का विशेष सत्र दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के बाद पवित्र मुहुर्त पर होता है। इस बार बीएसई और एनएसई मुहूर्त ट्रेडिंग 1 नवंबर को कराएंगे। शुक्रवार को सिर्फ मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए ही बाजार खुलेगा और बाकी के पूरे दिन बाजार बंद रहेगा। जानकारी के अनुसार मुहूर्त ट्रेडिंग 1 नवंबर की शाम 6 बजे से 7 बजे तक होगी। इसके साथ ही विक्रम संवत 2081 की भी शुरुआत होगी।
शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग शाम 6 से 7 बजे के बीच होगी, जबकि प्री ओपनिंग सेशन 5.45 बजे से होगा। मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान इक्विटी, कमोडिटी, डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, इक्विटी एफएंडओ , सिक्योरिटीज लेंडिंग-बॉरोविंग, सभी विकल्प खुले होंगे। लेकिन यह सभी कुछ सिर्फ एक घंटे के लिए विशेष सत्र के लिए ही होगा।

क्या आज खुला है बाजार
आज शेयर बाजार के खुलने की बात करें तो यह खुला है और सामान्य दिनों की ही तरह ट्रेडिंग हो रही है। सेंसेक्स आज गिरावट के साथ खुला है। शुरुआत में 100 अंक से अधिक गिरकर सेंसेक्स 80 हजार के नीचे चला गया है। फिलहाल सेंसेक्स 89824 पर ट्रेड कर रहा है। जबकि निफ्टी 30 अंक गिरकर 24310 पर ट्रेड कर रहा है।
परंपरा से जुड़ा इतिहास
मुहूर्त ट्रेडिंग का सार इसके समृद्ध इतिहास में निहित है, जिसकी शुरुआत बीएसई ने की थी और बाद में इसे एनएसई ने अपनाया। यह प्रथा परंपरा में डूबी हुई है, जो लंबे समय से चली आ रही इस मान्यता पर आधारित है कि इस शुभ घड़ी में किए गए निवेश से आने वाले पूरे साल समृद्धि आएगी।
यह एक ऐसी भावना है जो अनुभवी और कभी-कभार निवेश करने वाले दोनों तरह के निवेशकों को भाग्य का साथ पाने की उम्मीद में इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।
दिवाली एक ऐसा दिन है जब त्यौहार मनाने के लिए नियमित ट्रेडिंग सेशन रोक दिए जाते हैं, लेकिन मुहूर्त ट्रेडिंग का समय अपवाद रहता है। यह विशेष सत्र न केवल त्यौहार के दिन बाज़ारों को जीवंत रखता है बल्कि व्यापारियों और निवेशकों को नए संवत में अपने वित्तीय प्रयासों के लिए आशीर्वाद मांगने का एक प्रतीकात्मक क्षण भी प्रदान करता है।
मुहूर्त ट्रेडिंग केवल एक ट्रेडिंग सत्र नहीं है, बल्कि एक प्रिय परंपरा है जो वित्त और उत्सव को खूबसूरती से जोड़ती है। 1 नवंबर को ट्रेडिंग की इस एक घंटे की अवधि में भाग लेने वाले प्रतिभागी एक ऐसी प्रथा में भाग लेते हैं जो दशकों से आशा और समृद्धि की किरण रही है, जो दिवाली की स्थायी भावना और आने वाले वर्ष में धन और कल्याण की कालातीत खोज को प्रतिध्वनित करती है।












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